बिहार के वोटिंग प्रतिशय क्यों बन गया बहस का मुद्दा, बिहारियों ने किस पर और क्यों भरोसा किया है, पढ़िए !

    बिहार के वोटिंग प्रतिशय क्यों बन गया बहस का मुद्दा, बिहारियों ने किस पर और क्यों भरोसा किया है, पढ़िए !

    धनबाद (DHANBAD) : बिहार विधानसभा के पहले और अंतिम चरण में हुए मतदान के प्रतिशत को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. मतदाताओं ने जिस प्रकार घर से निकलकर मतदान किया, वह संख्या पूरे देश में बहस का मुद्दा बन गया है. 6 नवंबर को 121 विधानसभा सीटों पर 64.66 प्रतिशत वोट पड़े, जो कि 2020 के चुनाव से 7.37 प्रतिशत अधिक था. दूसरे चरण 11 नवंबर को 122 विधानसभा क्षेत्र में कुल 69.12% मतदान हुआ है. सवाल यह उठ रहे हैं, पूछे भी जा रहे हैं कि आखिर क्या वजह है कि बिहार के लोग लंबे समय से वोटिंग के प्रति उदासीन थे. लेकिन अचानक इतना उत्साह कैसे हो गया? हालांकि निश्चित रूप से तो कोई एक कारण नहीं बताया जा सकता है, लेकिन इसके कई कारण गिनाये जा रहे है. 

    प्रवासी मजदूर भी बहुत बड़े फैक्टर हो सकते है 

    विधानसभा चुनाव में  हुई जबरदस्त वोटिंग क्या एक संयोग है या छठ त्यौहार के बाद के चुनाव का डायरेक्ट नतीजा है. छठ पूजा, जो 5 से 8 नवंबर को मनाई गई, यह बिहारी का सबसे बड़ा त्यौहार होता है. लाखों प्रवासी मजदूर दूसरे शहरों से बिहार लौटते है.  यह भी  मतदान प्रतिशत बढ़ने का एक बहुत बड़ा फैक्टर हो सकता है. हालांकि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रवासी मजदूरों को ही बड़ा फैक्टर बताया है और कहा है कि छठ के लिए लौटे प्रवासी वोट डालने के लिए रुक गए. प्रवासी मजदूर साल में एक बार ही छठ के समय बिहार लौटते हैं और उन्होंने यहां रुक कर अपने घर, परिवार सहित गांव -जवार के लोगों को वोटिंग के लिए प्रोत्साहित किया. एक आंकड़े के अनुसार बिहार से तीन करोड़ से अधिक प्रवासी है. जिनमें से लाखों छठ के त्योहार पर घर लौटे है. हो सकता है कि यह एक बड़ा फैक्टर हो जाए.  

    मुस्लिम समुदाय के लोग क्या एकजुट होकर एनडीए के खिलाफ हुए ?

    यह भी हो सकता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग एनडीए को सत्ता से बाहर करने के लिए एक जुट होकर वोट डाला हो ? बिहार में मुसलमानों की 70% आबादी मुख्य रूप से सीमांचल, मगध और तिरहुत क्षेत्र में बसी है. राजद  का एमवाई समीकरण हमेशा मजबूत रहा है. मुस्लिम समुदाय के प्रवासी लोग भी बिहार लौटे हैं और वोट डालने के लिए रुके हुए थे. यह अलग बात है कि मुस्लिम वोट में कितनी सेंधमारी  हुई है, इस पर बहुत कुछ तय होगा. यह भी कहा जाता है कि यह  भी एक बड़ा कारण हो सकता है कि एसआईआर ने मतदान सूची  में शुद्धता बढ़ाया. जिसे भागीदारी बढ़ी, लगभग 65 लाख लोगों के नाम काटे गए.  यह  नाम या तो मृत्यु होने या  प्रवासी होने या डुप्लीकेसी की वजह से काटे गए और लाखों नए मतदाता भी जोड़े गए. 
     
    महिलाओं की लंबी लाइन सबको उलझा रहा है 
     
    महिलाओं को की भागीदारी को भी रिकॉर्ड वोटिंग का कारण बताया जा रहा है पहले चरण में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 5 से 7% अधिक था. महिलाओं के बंपर वोटिंग की वजह से ही नीतीश सरकार की वापसी एक मुद्दा बन गया. राजनीतिक पंडित भी मानते हैं कि महिलाएं जाति, धर्म से ऊपर उठकर वोटिंग की है. जो भी हो, एग्जिट पोल में तो एनडीए की सरकार की बहुमत से वापसी दिखाई और बताई जा रही है. हालांकि यह तो अनुमान है. 14 तारीख को ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि बिहार के लोगों ने किस पर भरोसा किया है? 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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