बीसीसीएल में क्यों शुरू हो गया "सफाई" अभियान, दो जीएम भेजे गए बाहर तो सुरक्षा की जिम्मेवारी भी अब दूसरे हाथों में !


धनबाद (DHANBAD): कोल इंडिया की सहायक कंपनी बीसीसीएल अपने उत्पादन और डिस्पैच प्रदर्शन को लेकर गंभीर हो गई है. अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है. कोयला चोरी भी एक्शन की जद में है. जिन इलाकों में कोयला चोरी की घटनाएं अधिक हो रही है, वहां के महाप्रबंधक को अब कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. बता दें कि बीसीसीएल के सीएमडी कोयला चोरी को लेकर सख्त रूप अपनाए हुए हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा था कि कोयला चोरी बीसीसीएल के लिए कोढ़ है और इस पर रोक लगाना प्राथमिकता होनी चाहिए. अब इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार दो महाप्रबंधक का अंतर कंपनी ट्रांसफर कर दिया गया है.
कम से कम तीन महाप्रबंधकों को दी गई है नई जिम्मेवारी
तीन महाप्रबंधक को कंपनी के भीतर नई जिम्मेवारी दी गई है. इधर, सूत्र बता रहे हैं कि जिन-जिन क्षेत्र में कोयला चोरी की शिकायतें अधिक आ रही है, वहां के बड़े अधिकारियों पर मजबूत कार्रवाई की तैयारी चल रही है. निकट भविष्य में कुछ अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है. सूचना के मुताबिक जिन दो महाप्रबंधकों का दूसरी कंपनी में स्थानांतरण किया गया है ,उनमें पीयूष किशोर को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड एवं प्रणव दास को महानदी कोल फील्ड लिमिटेड भेजा गया है. बात इतनी ही नहीं है, हफीजुल कुरैशी को सिक्योरिटी से हटाकर बस्तकोला का नया महाप्रबंधक बनाया गया है. वहीं विजय कुमार को गोविंदपुर एरिया का महाप्रबंधक बनाया गया है. एम आर श्रीवास्तव को सिक्योरिटी की जिम्मेवारी दी गई है.
कोयला उत्पादन और डिस्पैच को लेकर कंपनी मैनेजमेंट दबाव में
बता दें कि कोयला उत्पादन और डिस्पैच को लेकर कंपनी मैनेजमेंट दबाव में है. इधर, बीसीसीएल के कोयले के खरीदारों में भी कमी आ रही है. कई उपभोक्ता कोयला लेने से साफ इनकार कर दिए हैं. वह तकनीकी बातों के साथ-साथ कोयले की गुणवत्ता का भी सवाल उठा रहे हैं. कोयला चोरी तो लाइलाज बीमारी बन गई है. लोकल उद्योगों को सस्ते में चोरी का कोयला उपलब्ध हो जा रहा, इस वजह से वह कंपनी का कोयला खरीदने में रुचि नहीं दिखाते. यह अलग बात है कि कंपनी की कोयला वितरण व्यवस्था से भी स्थानीय उद्योग मलिक खुश नहीं है. बहरहाल कंपनी अब सफाई अभियान की शुरुआत कर दी है, तो देखना है कि यह अभियान आगे आगे कहां तक पहुंचता है.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
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