भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सीएम हेमंत सोरेन और उनके विधायक भाई को लेकर क्या भविष्यवाणी की, जानिए पूरी खबर में

    भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सीएम हेमंत सोरेन और उनके विधायक भाई को लेकर क्या भविष्यवाणी की, जानिए पूरी खबर में

    दुमका (DUMKA): गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे दुमका पहुंचे. दरअसल आदर्श चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के दो मामले में दुमका कोर्ट में उनकी पेशी हुई. कोर्ट में सशरीर उपस्थित होने के बाद दुमका परिसदन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. प्रेस वार्ता के दौरान निशिकांत दुबे ने कहा कि अक्टूबर या नवंबर में दुमका और बरहेट विधानसभा का उपचुनाव संभावित लग रहा है. उन्होंने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन और उनके छोटे भाई विधायक बसंत सोरेन का मामला निर्वाचन आयोग में चल रहा है और जल्द ही उस पर फैसला आना है. सांसद ने कहा कि भाजपा ही इस केस में पार्टी है और भाजपा के कार्यकर्ता होने के नाते उन्हें पूरा विश्वास है कि सीएम हेमंत सोरेन और विधायक बसंत सोरेन की विधायकी  समाप्त होने जा रही है. इस स्थिति में दुमका और बरहेट विधानसभा का उपचुनाव अवश्यंभावी लग रहा है.

    भाजपा को करना पड़ा पराजय का सामना

    विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के अब तक के प्रदर्शन को देखते हुए जब उनसे सवाल पूछा गया कि वर्तमान कार्यकाल में झारखंड के तमाम उपचुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा है, जिसका उदाहरण दुमका विधानसभा का उपचुनाव भी है, उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस बार चुनाव कोई भी लड़े, लेकिन चुनाव के संचालन की जिम्मेदारी निशिकांत दुबे पर होगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व से यह अनुरोध किया गया है कि दोनों विधानसभा उपचुनाव के लिए संथाल परगना प्रमंडल के 6 जिले के कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी को ही लगाया जाए. प्रदेश स्तर से विधायक दल के नेता और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निश्चित रूप से केम्प करेंगे, लेकिन सारा दारोमदार संथाल परगना प्रमंडल के पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारियों पर ही रहेगी. उन्होंने कहा कि दुमका विधानसभा के लिए देवघर, दुमका और जामताड़ा के कार्यकर्ता कार्य करेंगे जबकि बरहेट विधानसभा के लिए गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज के कार्यकर्ता मैदान में उतरेंगे.

    जदयू के विधायकों को तोड़ने का प्रयास

    झारखंड की राजनीतिक हालात के बाद सांसद निशिकांत दुबे बिहार की राजनीतिक हालात पर भी बोलने से बाज नहीं आए. उन्होंने कहा कि कहने वाले भले ही कह दे कि जदयू के विधायकों को तोड़ने का प्रयास भाजपा  की ओर से किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि जदयू के विधायकों को तोड़ने का प्रयास राजद की ओर किया गया. उन्होंने कहा AIMIM के विधायक जब राजद में चले गए तो सरकार बनाने के लिए राजद को महज 3 विधायकों की जरूरत थी. जिसे पूरा करने के लिए राजद द्वारा जदयू के विधायकों को तोड़ने का प्रयास किया गया. नीतीश कुमार को इसकी जानकारी मिल गयी तो उन्होंने सीएम की कुर्सी पर बने रहने के लिए BJP ने नाता तोड़ राजद से नाता जोड़ लिया. उन्होंने कहा कि बिहार की वर्तमान सरकार कितने दिन चलेगी यह कहना मुश्किल है. क्योंकि सभी दलों के अपने अपने चुनावी वादे है. जनता जरूर पूछेगी. गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे संथाल परगना की धरती पर आएं और राजनीतिक बयानबाजी ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता. राजनीतिक बम फोड़कर वो यहां से चले जाते है.

    रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका


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