डॉ इरफान अंसारी ने क्यों कह दिया कि-कान खोलकर सुन लीजिये रघुवर चाचा, क्यों गर्म हो गया है मामला, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    डॉ इरफान अंसारी ने क्यों कह दिया कि-कान खोलकर सुन लीजिये रघुवर चाचा, क्यों गर्म हो गया है मामला, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में अभी इस बात की लड़ाई चल रही है कि आदिवासियों का हितैषी कौन है? यह लड़ाई भाजपा के भीतर भी चल रही है तो कांग्रेस के भीतर भी जारी है. सोशल मीडिया पर अलग-अलग ट्वीट को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और वर्तमान में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी आमने-सामने हो गए है. इरफान अंसारी ने कह दिया है कि सुन लीजिए चाचा-दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्वीट किया था कि आदिवासी समाज के उत्थान के लिए मोदी सरकार ने जो समर्पण दिखाया है, वह ऐतिहासिक है.  80,000 करोड़ के बजट से धरती आबा जनजातीय गौरव अभियान के तहत गांव तक सुविधा पहुंच रही है. यह नया भारत आदिवासियों के सम्मान और सशक्तिकरण की पहचान बन चुका है. 

    रघुवर दास आदिवासियों के बीच पैठ  बनाने की कर रहे कोशिश 

     वैसे भी रघुवर दास हाल के दिनों में आदिवासियों के बीच पैठ  बनाने के लिए लगातार सक्रिय और गतिशील है. अभी हाल ही में वह बोकारो, धनबाद, जामताड़ा होते हुए दुमका पहुंचे थे. दुमका में रघुवर दास ने कहा कि वह आदिवासियों में जन जागृति पैदा करने के लिए पदयात्रा करेंगे. फिलहाल भाजपा में भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली होने वाली है और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के रेस में रघुवर दास भी शामिल है. बाबूलाल मरांडी के नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली होगी और किसी की उसपर ताजपोशी  की जाएगी.  

    डॉ इरफान अंसारी ने ट्वीट में क्या कहा है 

    इधर, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने ट्वीट कर कहा है कि कान खोलकर सुन लीजिए- रघुवर चाचा!! आदिवासी कभी कट्टर आरएसएस  नहीं हो सकता. आदिवासी कोई धर्म नहीं, आदिवासी एक सभ्यता है.  एक संस्कृति है, ऐसी संस्कृति जो पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर करती है और इसे हमें बचा कर रखना है और यह काम कांग्रेस पार्टी ही कर सकती  है.    

    बता दें कि अभी झारखंड में आदिवासियों का हितेषी साबित करने के लिए होड़ मची हुई है. कांग्रेस पेसा कानून, सरना धर्म कोड को लेकर आगे बढ़ चुकी है. अनुसूचित जाति के लिए भी काम कर रही है. यह अलग बात है कि यह बात निश्चित रूप से झामुमो को नागवार गुजर रहा है, बावजूद अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इधर, रघुवर दास और डॉक्टर इरफान अंसारी आदिवासियों के मुद्दे पर आमने-सामने दिख रहे है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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