धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर क्यों बन गया था रणक्षेत्र, फिर आगे क्या हुआ, पढ़िए

    धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर क्यों बन गया था रणक्षेत्र, फिर आगे क्या हुआ, पढ़िए

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर गुरुवार को रणक्षेत्र बना हुआ था.  एक तरफ पुलिस की मोर्चाबंदी थी तो दूसरी तरफ ग्रामीण मोर्चा संभाले हुए थे.  दरअसल, आज मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच चाहरदीवारी  निर्माण का कार्य शुरू किया गया.  भारी संख्या में पुलिस बल लगाया गया था.  धनबाद के  अंचलाधिकारी, एडीएम, डीएसपी (लॉ एंड  ऑर्डर) सहित बड़े अधिकारी कैंप कर रहे थे.  ग्रामीण चाहरदीवारी  का यह कहते हुए विरोध कर रहे थे कि बाउंड्री   हो जाने से उन्हें परेशानी होगी.  उनका रोजी-रोटी खत्म हो जाएगा, जबकि अधिकारी उन्हें समझा  रहे थे कि  रास्ता बंद नहीं किया जा रहा है. 

    महिलाएं बाउंड्री वालों के बुनियाद के पास आकर लेट जा रही थी
     
    बाउंड्री वाल के बीच में एक रिवाल्विंग गेट रहेगा, जिससे  कोई भी आ जा सकता है.  ग्रामीण इसको लेकर तैयार नहीं थे.  दरअसल, अस्पताल के सामने दवा सहित अन्य दुकान लगी हुई है.  ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल से ही उनका रोजी -रोजगार चलता है.  इसलिए, चाहरदीवारी  का वह विरोध कर रहे है.  महिलाएं बाउंड्री वालों के बुनियाद के पास आकर लेट जा रही थी.  जिन्हें महिला सुरक्षा बल हटा रही थी.  अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों को समझा  लिया गया है.   जहां उनका विरोध है, वहां उनसे बातचीत करने के बाद ही काम शुरू कराया जाएगा.  दरअसल बुधवार को चारदीवारी को लेकर अधिकारियों की बैठक हुई थी. 

    सुरक्षा के ख्याल से  बाउंड्री  का निर्माण जरुरी बताया गया है 
     
    इस बैठक में तय किया गया था कि सुरक्षा के ख्याल से  बाउंड्री  का निर्माण कराया जाए.  सुरक्षा के ख्याल से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर के चारों ओर बाउंड्री को अनिवार्य बताया गया था.  इसके पहले भी बाउंड्री के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था, लेकिन कैंपस से सटे दवा दुकानदारों और कुछ ग्रामीणों के विरोध के बाद में गेट के पास बाउंड्री निर्माण का काम बंद हो गया था.  लेकिन आज बाउंड्री का काम शुरू कर दिया गया है.  बता दें कि धनबाद का यह सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है.  दिन-रात वहां मरीजों का आना-जाना लगा रहता है.  सुरक्षा के ख्याल से बाउंड्री  जरूरी भी है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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