संथाल और कोल्हान किसका राजनीतिक भविष्य तय करेगा तो किसे बनाएगा सीएम, पढ़िए इस रिपोर्ट में!

    संथाल और कोल्हान किसका राजनीतिक भविष्य तय करेगा तो किसे बनाएगा सीएम, पढ़िए इस रिपोर्ट में!

    धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा ने नारा दिया है, भटकों मत हेमंत, मुद्दों पर अटको. इसके अलावा इस बार के चुनाव में दीदी बनाम मंईयां पर भी चुनाव होगा. वैसे तो झारखंड की सत्ता की चाबी कोल्हान और संथाल के पास होती है. कोल्हान और संथाल में कुल 32 सीटें हैं. कोल्हान में 14 और संथाल  में 18 सीट हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो और कांग्रेस ने 26 सीट जीत कर सरकार बनाई थी. इस बार के चुनाव में संथाल और कोल्हान में लड़ाई रोचक होगी. किसी का भविष्य तय होगा तो कोई मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचेगा. संथाल परगना में वीआईपी सीट की बात की जाए तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम पहले आएगा. वह बरहेट से विधायक हैं और पूरी संभावना है कि फिर यहीं से चुनाव लड़ेंगे. संथाल परगना में और भी महत्वपूर्ण सीट हैं. जैसे मधुपुर से हफीजुल हसन अभी मंत्री हैं. जामताड़ा से इरफान अंसारी भी मंत्री हैं. इसके अलावा झामुमो छोड़ भाजपा में शामिल सीता सोरेन और लोबिन हेंब्रम की भी चर्चा रहेगी. पाकुड़ विधायक आलमगीर आलम की भी चर्चा होगी. फिलहाल वह जेल में है. वह चुनाव लड़ेंगे अथवा नहीं, उनकी पत्नी चुनाव लड़ेगी या और कोई, इस पर अभी कयास चल रहा है.

    कोल्हान की बात की जाए तो यहां भी परिस्थितियां कुछ ऐसी ही है. कोल्हान के कई दिग्गज सत्ता का समीकरण बैठाने में भूमिका निभा सकते हैं. फिलहाल सबसे अधिक चर्चा चंपाई सोरेन के राजनीतिक भविष्य को लेकर हो रही है. चंपाई सोरेन अगर चल गए तो भाजपा को लाभ होगा. पिछली बार जहां कोल्हान में भाजपा को एक भी सीट नहीं आई थी. इस बार चंपाई सोरेन के भरोसे बेहतर परफॉर्मेंस का भाजपा को उम्मीद है. भाजपा के एक और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा लोकसभा चुनाव खूंटी से हारने के बाद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या अपनी पत्नी को लड़ाएंगे, इस पर अभी संशय है. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा भी चुनाव में प्रभाव डालेंगे और पूर्व सांसद रही गीता कोड़ा को विधानसभा पहुंचाने में पूरा जोर लगाएंगे.

    जमशेदपुर पश्चिम से कांग्रेस के टिकट पर बन्ना गुप्ता चुनाव मैदान में रहेंगे. घाटशिला सीट से चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन भी किस्मत आजमाने की तैयारी में है. इधर 5 वर्षों में झारखंड की कई सीटों की तस्वीर बदल गई है. कुछ सीटों पर जीतने वाले विधायक सांसद बन गए. 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सबसे पहला उप चुनाव दुमका और बेरमो में हुआ. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दो-दो सीटों से जीते थे. बाद में उन्होंने दुमका सीट छोड़ दी. दुमका सीट पर हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन विधायक चुने गए. वहीं बेरमो के विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह के निधन के बाद वहां हुए उपचुनाव में उनके पुत्र अनूप सिंह चुनाव जीते. 2019 के चुनाव के बाद झारखंड में आधा दर्जन सीटों पर उपचुनाव कराना पड़ा. डुमरी के विधायक जगरनाथ महतो और मधुपुर के विधायक हाजी हुसैन अंसारी कोरोना की चपेट में आ गए. लंबी इलाज के बाद दोनों का निधन हो गया. डुमरी में हुए उपचुनाव में जगरनाथ महतो की पत्नी बेबी देवी चुनाव जीती. जबकि मधुपुर से हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल हसन चुनाव जीते. दोनों अभी मंत्री हैं. इसके अलावे मांडर में भी उप चुनाव हुआ. रामगढ़ में भी उपचुनाव हुआ. इस साल हुए लोकसभा चुनाव में झारखंड के चार विधायक सांसद बन गए. भाजपा के टिकट पर हजारीबाग विधायक मनीष जायसवाल और बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो सांसद बन गए. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा से मनोहरपुर की विधायक जोबा मांझी सांसद बन गई. यह अलग बात है कि विधानसभा चुनाव के लिए 6 महीने से कम वक्त होने से यहां उपचुनाव नहीं कराया गया. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2019 से लेकर 2024 तक झारखंड ने कई बदलाव देखे हैं. 2024 का चुनाव क्या रंग दिखाता है, यह देखने वाली बात होगी.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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