कब होगा चंपई सरकार के मंत्रिमंडल का गठन ? लोगों को सता रही है राज्य के विकास की चिंता, पढ़िए क्या सोच रहें हैं लोग

    कब होगा चंपई सरकार के मंत्रिमंडल का गठन ? लोगों को सता रही है राज्य के विकास की चिंता, पढ़िए क्या सोच रहें हैं लोग

    गुमला(GUMLA):झारखंड में हेमंत सरकार के इस्तीफा देने के बाद बनी चंपई सरकार का कैबिनेट का विस्तार नहीं होने से गुमला के लोग चिंतित हैं, क्योंकि इसकी वजह ले राज्य में विकास के कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं. ऐसे में लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि राज्य में सरकार है भी या नहीं, क्योंकि मुख्यमंत्री के रूप में चंपई सोरेन ने जब शपथ ग्रहण किया उस दौरान केवल दो ही लोगों को शपथ दिलवाया गया था, हालांकि उनके बीच भी अभी तक मंत्रालय का वितरण नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से जनता को यह समझ में नहीं आ रही है कि राज्य का विकास कैसे हो पाएगा, इस मामले को लेकर जहां कई तरह के अटकलें लगाई जा रही है.आपको बताये कि एक बार फिर कैबिनेट विस्तार की तिथि निर्धारित करने के बाद उसे स्थगित कर दिया गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लोगों के अंदर कई तरह के सवाल उठ रहे है. ऐसे में स्थानीय लोगों ने इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की है, कि झारखंड जैसे राज्य में इस तरह की स्थिति का बना निश्चित रूप से काफी चिंता का विषय है.

    जनता का सवाल सरकार जब बन गई है तो मंत्रिमंडल का गठन क्यों नहीं हो पा रहा है

     वहीं हर समुदाय के लोगों के अंदर यह भावना बनी हुई है कि आखिरकार सरकार जब बन गई है तो मंत्रिमंडल का गठन क्यों नहीं हो पा रहा है, वर्तमान समय में यदि हम देखे तो चंपई सोरेन सरकार का कालखंड एक वर्ष से भी काम बचा हुआ है, ऐसे में जैसे-जैसे दिन बीत रहा है लोगों को लग रहा है कि यदि कैबिनेट सही रूप से गठित हो जाता, तो राज्य के विकास में तेजी आती, लेकिन लोगों ने इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की है कि यह केवल झारखंड का ही मसला नहीं है कई राज्यों में वर्तमान समय में ऐसी परिस्थितियों सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल के गठन में काफी समय लग रहा है, खास करके जब गठबंधन दल की सरकार होती है तो वहां पर मंत्रिपरिषद का गठन हो पाना थोड़ा परेशानी का सबक बनता हुआ नजर आ रहा है.

    वर्तमान समय में राजनेताओं में नैतिकता का घोर अभाव देखने को मिल रहा है

     स्थानीय लोगों का कहाना है कि वर्तमान समय में राजनेताओं में नैतिकता का घोर अभाव देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से हर कोई सरकार में शामिल होने के बाद सेवा भावना से अलग-अलग होकर मंत्री परिषद में जगह प्रकार मलाई खाने की फिराक में लगा हुआ है. गुमला जिला के कुछ लोगों से जब हमने इस मुद्दे पर बातचीत किया तो लोगों ने अपनी राय रखते हुए अलग-अलग तरह की बातों को रखा. एक शिक्षिका ने कहा कि जब वह क्लास में बच्चों को पढ़ाती है तो बच्चों के द्वारा यह सवाल पूछा जाता है कि राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार क्यों नहीं हो पा रहा है, ऐसे में उन्हें जवाब देने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि यदि सभी मंत्रालय का सही रूप से विभाजन हो जाता और मंत्रियों को जवाब दे मिल जाती तो निश्चित रूप से इस राज्य का विकास कार्य और तेज हो सकता था,

    वर्तमान में नेता अपने राज्य नहीं अपने परिवार का करते है भला

    विगत कुछ दिनों में जिस तरह से माहौल बन रहा है उसे यह स्पष्ट होता हुआ नजर आ रहा है कि आज के समय में लोग समाज की सेवा के नाम पर विधायक और सांसद तो बन जाते हैं लेकिन उनके अंदर सेवा की भावना कम होती है मेवा खाने की भावना ज्यादा देखने को मिलती है यही वजह है कि विधायक बनने के बाद वे लोग आम जनता के प्रति जिम्मेवार ना होकर केवल अपने चाहे तो और अपने परिवार के लोगों के हितों के बारे में ज्यादा सोचते हैं जिसका परिणाम है कि आज भी राज्य के कई इलाकों में विकास की किरण नहीं पहुंच पाती है और लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में हर कोई इस बात को लेकर मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से यह सवाल पूछना चाहता है कि आखिरकार जब बहुमत में सरकार आ चुकी है तो मंत्रिमंडल का गठन क्यों नहीं किया जा रहा है जो की एक राज्य की जनता को गलत संदेश देने का काम कर रहा है.

    रिपोर्ट-सुशील कुमार


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