Coal india की कोलियरियों में क्या है हलचल ,कंपनी ने क्यों किया है मापी टीम के  गठन नियम में बदलाव !!

    कोलियरी इलाकों  में हलचल है.  एरिया के कोयला अधिकारी भी परेशान हैं.  कोलियारियों में कोयले का कितना स्टॉक  पड़ा हुआ है, इसकी मापी  का अभियान कुछ घंटे बाद ही शुरू होने वाला है.

    Coal india की कोलियरियों में क्या है हलचल ,कंपनी ने क्यों किया है मापी टीम के  गठन नियम में बदलाव !!

    धनबाद(DHANBAD) | कोलियरी इलाकों  में हलचल है.  एरिया के कोयला अधिकारी भी परेशान हैं.  कोलियारियों में कोयले का कितना स्टॉक  पड़ा हुआ है, इसकी मापी  का अभियान कुछ घंटे बाद ही शुरू होने वाला है.  दरअसल, हर एक साल कोल इंडिया अपनी सहायक कंपनियों की   महत्वपूर्ण कोलियरी क्षेत्र में कोयले के स्टॉक की मापी  कराती  है.  कोयले की गुणवत्ता को देखा जाता है. कहीं  ऐसा तो नहीं कि  कोयले की जगह ओवरबर्डन  रख दिया गया है.  केवल कागज में ही कोयले का स्टॉक तो नहीं दिखाया जा रहा है.  टीम इन सब बातों की जांच करेगी।  

    इंटर कंपनी के अधिकारियो की टीम पहुँचेंगीं मापी करने 

    इस साल भी सूत्रों के मुताबिक पहली अप्रैल से जांच शुरू होने वाली है.  पहले फेज में बीसीसीएल सहित कोल इंडिया की महत्वपूर्ण इकाइयों में यह जांच शुरू की जाएगी।   इस बार कोल्  इंडिया ने तरकीब में थोड़ा बदलाव किया है.  इस बार कोल्  इंडिया सहायक कंपनियां के अधिकारियों को साथ जोड़कर इंटर कंपनी टीम बनाई है.  माना जा रहा है कि इस प्रयास से सही स्थिति सामने आ सकती है.  इस जांच का उद्देश्य होता है कि कोयला स्टॉक का सही आंकड़ा प्रबंधन के सामने आए और उत्पादन तथा डिस्पैच के बीच अगर कोई डिफरेंस है, तो उसे ढूंढा जा सके.  बीसीसीएल के पास कम से कम आधा दर्जन बड़े एरिया हिन्।  वहां इसकी  मापी  शुरू होगी।  कई ओपन कास्ट प्रोजेक्ट और वाशरी  भी हैं.  उनके स्टॉक की भी जांच होगी।  

    इस बार मापी टीम में किया गया है बड़ा बदलाव 

    सूत्रों के अनुसार टीम में एक टीम लीडर और दो तकनीकी जानकारी रखने वाले होंगे।  यह अधिकारी सर्वे, खनन  और जियोमैटिक्स  से जुड़े होंगे।  इसके अलावा रिजर्व टीम भी होगी।  सूत्रों के अनुसार यह माफी प्रक्रिया सिर्फ एक सिस्टम नहीं है, बल्कि इससे कंपनी के क्रियाकलापों में पारदर्शिता भी आती है.  इसे यह भी पता चलेगा कि जितना कोयला उत्पादन दिखाया जा रहा है, उतना सही में मौजूद है  अथवा नहीं। आउटसोर्स कंपनियों के साथ मिलकर कुछ गड़बड़ तो नहीं किया जा रहा.  दरअसल, पहले ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि कोयला का उत्पादन कुछ और होता है, स्टॉक कुछ और दिखाया जाता  है.  कोयले के डीओ  होल्डर जब कोयला उठाने जाते हैं, तो कोयला मिलता नहीं है और अगर मिलता भी है तो गुणवत्ता सही नहीं होती है.  कोल इंडिया से बड़े-बड़े उद्योगों का मोह  भंग होने का एक प्रमुख वजह गुणवत्ता भी बताया जाता है.  शायद, इसलिए कंपनी ने इस बार तरीके को बदला है और उत्पादन और स्टॉक में जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां के अधिकारी एक्शन की जड़  में आएंगे।  देखना है आगे इसमें होता है क्या---?

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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