वेटलैंड इकोलॉजिस्ट डॉ.गोल्डिन क्वाड्रस ने उधवा झील पक्षी आश्रयणी का किया निरीक्षण, विकास पर की गई चर्चा

    वेटलैंड इकोलॉजिस्ट डॉ.गोल्डिन क्वाड्रस ने उधवा झील पक्षी आश्रयणी का किया निरीक्षण, विकास पर की गई चर्चा

    साहिबगंज(SAHIBGANJ): प्रसिद्ध वेटलैंड इकोलॉजिस्ट और सीनियर साइंटिस्ट डॉ.गोल्डिन क्वाड्रस की टीम ने संयुक्त रूप से राज्य के एकमात्र रामसर साइट उधवा झील पक्षी आश्रयणी का भ्रमण किया. यह आश्रयणी अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमियों में गिनी जाती है, जो प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है. इस अवसर पर डॉ.क्वाड्रस ने आश्रयणी क्षेत्र का निरीक्षण किया और जैव विविधता,जल गुणवत्ता और प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति की स्थिति का आकलन किया. उन्होंने कहा कि उधवा झील जैसी आर्द्रभूमियां पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है.

    इस दौरान उधवा बर्ड सैंक्चुअरी के संरक्षण और विकास को लेकर एक विशेष बैठक भी आयोजित की गई. जिसमें वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग और रेंजर पंचम दुबे व वन रक्षक उपस्थित रहे. बैठक में उधवा पक्षी आश्रयणी के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने, स्थानीय समुदाय की सहभागिता और अवैध गतिविधियों की रोकथाम जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई. बैठक में डॉ.क्वाड्रस ने सुझाव दिया कि झील क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग पक्षी गणना और जल गुणवत्ता परीक्षण की प्रणाली को और अधिक वैज्ञानिक आधार पर किया जाना चाहिए.इसके साथ ही उन्होंने झील के चारों ओर अवस्थित गांवों के लोगों को जागरूक कर उनके साथ मिलकर संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

    वहीं, डीएफओ प्रबल गर्ग ने आश्वस्त किया कि विभाग उधवा झील पक्षी आश्रयणी के समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और विशेषज्ञों से मिलकर एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी. यह भ्रमण न केवल उधवा झील के महत्व को रेखांकित करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे वैज्ञानिकों और वन विभाग के सहयोग से जैविक धरोहरों को संरक्षित किया जा सकता है.

    रिपोर्ट: गोविंद ठाकुर

     

     

     

     


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