Wakf Board Act: वक्फ बोर्ड की जमीन पर तकरार, क्या फिर नए विवाद का होगा जन्म, मोदी सरकार क्यों करना चाह रही संसोधन   

    Wakf Board Act: वक्फ बोर्ड की जमीन पर तकरार, क्या फिर नए विवाद का होगा जन्म, मोदी सरकार क्यों करना चाह रही संसोधन   

    पटना(PATNA): वक्फ बोर्ड एक बार फिर से चर्चा में है. कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार की मोदी सरकार वक्फ एक्ट में बदलाव करने की तैयारी में है. रेलवे और कैथोलिक चर्च के बाद सबसे ज्यादा जमीन अगर किसी के पास है तो वो है वक्फ बोर्ड. अब ऐसे के बिहार की सियासत गर्म नजर आने लगी है. बीजेपी वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर नीतीश कुमार से बड़ी मांग की है तो जेडीयू ने कहा वक्फ बोर्ड की जमीन हमारे बुजुर्गों की है. वहीं इस संशोधन को लेकर राजद ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा कर रही है.    

    देश में जमीन के मामले में तीसरे नंबर पर है बोर्ड

    केंद्र की मोदी सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में संशोधन करने जा रही है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार नए कानून के जरिए वक्फ बोर्ड के अधिकारों को कम करना चाहती है. कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड की किसी भी संपत्ति को अपना बनाने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहती है. वक्फ बोर्ड के मुताबिक देशभर ने कुल 30 बोर्ड है. वक्फ बोर्ड के पास करीब 9 लाख एकड़ से ज्यादा की संपत्ति है. जमीन के मामले में वक्फ बोर्ड तो देश का तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामी है. वक्फ बोर्ड से ज्यादा जमीन सिर्फ रेलवे और सशस्त्र सुरक्षा बलों के पास है.  

    अब ऐसे में बिहार बीजेपी के विधायक हरीभूषण ठाकुर बचौल ने वक्फ बोर्ड को पूरी तरह से समाप्त कर देने की मांग की है. वक्फ बोर्ड पूरे देश में जमीन जिहाद चलाने का काम कर रही है. बिहार में सरकारी जमीनों को वक्फ ने कब्जा कर लिया. यह कानून से सरकार को अपनी जमीन मिल जाएगी.

    भाजपा से अलग JDU की राह

    केंद्र में और बिहार में जदयू भले ही भाजपा के साथ है, लेकिन कुछ नीतियों पर जदयू नेताओं की राय अलग होती है. अब केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड को लेकर भले ही संशोधन बिल लाने की तैयारी में है. लेकिन बीजेपी जिस तरह से इस जमीन को लेकर दावा कर रही है. इस पर जदयू नेता का मानना है कि यह जमीन उनके पुरखों की है और यह जमीन हमारी है इसे कोई ले नहीं सकता.

    नया विवाद को जन्म देने की तैयारी

    इस मामले को लेकर आरजेडी कांग्रेस ने बीजेपी पर संशोधन बिल पास कर जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड के अधिकारों में संशोधन बिल लाकर देश के शांत माहौल को खराब देखना चाहती है. जदयू हो या रामविलास पासवान की पार्टी या जीतन राम मांझी सभी लोग चुप हैं. सभी लोग खुद को सेक्यूलर बताते हैं. शकील अहमद खां ने कहा वक्फ का मतलब दान होता है अल्पसंख्यक पुरखों के दान की जमीन को हड़पना चाहती है बीजेपी. दान किए गए जमीन से कई सामाजिक काम चलाते हैं. वही आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी कहा कि केंद्र की मोदी सरकार विवादित मुद्दा लाकर देश का माहौल खराब करना चाह रही है. राजद ने नेता ने कहा कि असली मुद्दों पर देश के संसद में बीजेपी बहस नहीं करना चाहती है इसलिए विवादित मुद्दों को लाकर असली मुद्दा गायब करने की कोशिश में लगी है.  

    कब क्या मिला अधिकार

    बहरहाल वक्फ का मतलब उन संपत्तियों से है जो इस्लामी कानून के तहत विशेष रूप से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित की गई हों. 1954 में पहला वक्फ आया था. उस समय नेहरू सरकार ने वक्फ बोर्ड अधिनियम 1954 के तहत भारत से पाकिस्तान गए मुसलमानों की जमीन वक्फ बोर्ड को दे दी. 1995 में पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को जमीन अधिग्रहण के असीमित अधिकार दे दिए थे. 2013 में मनमोहन सरकार ने वक्फ बोर्ड को और शक्ति दे दी.  इसके बाद वक्फ बोर्ड को जमीन पर अपना दावा ठोकने के लिए कोई सबूत देने की जरूरत नहीं. इतना ही नहीं मनमोहन सरकार ने लोकसभा चुनाव 2014 से ठीक पहले दिल्ली वक्फ बोर्ड को नई दिल्ली में 123 प्रमुख संपत्तियां उपहार में दे दी थीं. अब ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर सदन के अंदर जो संशोधित बिल लाने की तयारी की देखना है कि सदन में बीजेपी का समर्थन कितने सांसद करते हैं.


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