बेरोजगारी ने बढाया टेंशन ! झारखंड में समय से पहले ब्लडप्रेशर और शुगर से पीड़ित हो रहें युवक और युवतियां, रिपोर्ट में खुलासा


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जिसका समाधान आज भी पूरी तरीके से नहीं हो पाया है.वही बात अगर झारखंड में बेरोजगारी की जाए तो पढ़े लिखे युवा बेरोजगार घूम रहे है.जिनको अपने भविष्य की चिंता सता रही है कि आगे उनके परिवार का निर्वाह कैसा होगा और उनका जीवन कैसे बीतेगा. बेरोजगारी को लेकर झारखंड के युवा आए दिन सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते है लेकिन अब तक इसका कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है.वही अब एक रिपोर्ट में ख़ुलासा हुआ है कि झारखंड में बेरोजगार युवा अब टेंशन के मारे गंभीर बिमारियों के शिकार हो रहे है.
युवाओं के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रही है बेरोजगारी
आपको बताए कि झारखंड में बेरोजगारी अब सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रही है.एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राज्य में 20 से 35 वर्ष की उम्र के युवक और युवतियां समय से पहले ही हाई ब्लड प्रेशर (BP) और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे है.रिपोर्ट के आने के बाद लोग परेशान है कि अब इसके आगे क्या होगा.बेरोजगारी की मार इतनी मजबूत है कि झारखंड का भविष्य ही खतरे में है.
मानसिक तनाव बड़ी वजह
वही रिपोर्ट पर विशेषज्ञ ने अपनी राय भी दी है और इसके पीछे की वजह भी बताई है.विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ता मानसिक तनाव, अनिश्चित भविष्य और रोजगार की कमी है.नौकरी नहीं मिलने की वजह से झारखंड के युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते है, जिससे तनाव बढ़ रहा है और उनके स्वास्थ्य पर अब इसका बुरा असर देखने को मिल रहा है.जिसे वे समय से पहले ही गंभीर बिमारियों की चपेट में आ रहे है.जो झारखंड के लिए आगे चलकर बहुत बड़ी समस्या खड़ा कर सकता है.
ये है झारखंड के युवाओं के डिप्रेशन की वजह
रिपोर्ट की माने तो पढ़े-लिखे युवा सालों तक नौकरी की तलाश में भटक रहे है. प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, रिजल्ट लंबित रहना, भर्तियों का अटकना और निजी क्षेत्र में सीमित अवसर—ये सभी कारण युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद की कमी को बढ़ा रहे है.यही तनाव धीरे-धीरे BP और शुगर जैसी बीमारियों को जन्म दे रहा है.
ओपीडी में आने वाले मरीजों में अब बड़ी संख्या युवा वर्ग
आपको बताएं कि झारखंड के सरकारी और निजी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में अब बड़ी संख्या युवा वर्ग की है.पहले जहां 40–45 साल के बाद BP-शुगर की शिकायत आम थी.वहीं अब 25–30 साल के युवक-युवतियां भी नियमित दवा लेने को मजबूर है.डॉक्टरों के अनुसार, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार मोबाइल व सोशल मीडिया पर रहने की आदत भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है.
मानसिक बोझ बढ़ा रही है आर्थिक असुरक्षा
ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक युवा वर्ग पर परिवार की जिम्मेदारी, शादी का दबाव और आर्थिक असुरक्षा मानसिक बोझ बढ़ा रही है.कई युवा खुद को असफल मानने लगते है, जिसका असर सीधे उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में युवाओं को बीमारी का पता तब चलता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.
झारखंड सरकार को गंभीर कदम उठाने की जरुरत
वही सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े विषेशज्ञों का कहना है कि सरकार को इस पर गंभीर कदम उठाना चाहिए.वरना वो समय दूर नहीं जब झारखंड में स्वास्थ्य आपदा बड़ी समस्या बन जाएगी.स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि बेरोजगारी को सिर्फ रोजगार का मुद्दा न मानकर स्वास्थ्य आपदा के रूप में भी देखा जाए और समय पर भर्तियां,काउंसलिंग सेंटर,युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम,और रोजगार सृजन की ठोस नीतिइन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है.
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