गांधी जयंती के उपलक्ष्य में CUJ में आयोजित हुआ दो दिवसीय कार्यक्रम, गांधी के विचारों और सिद्धांतों का बताया गया महत्व  

    गांधी जयंती के उपलक्ष्य में CUJ में आयोजित हुआ दो दिवसीय कार्यक्रम, गांधी के विचारों और सिद्धांतों का बताया गया महत्व  

    रांची(RANCHI): राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153वीं जयंती आने में कुछ ही दिन बचे हैं. गांधी जयंती को लेकर देश के तमाम स्कूल और कॉलेजों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. गांधी जयंती का मुख्य उदेश्य गांधी के विचारों और सिद्धांतों को समझना है. इसी उद्देश्य से झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय गांधी स्टडी सेंटर के द्वारा में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस आयोजन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने की.  इस कार्यक्रम मएएन गांधी जयंती के उपलक्ष्य में एक व्याख्यान का  भी  आयोजन किया गया.

    “सस्टेनेबल विकास का पथ गांधी दर्शन के बिना है अधूरा”

    नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रांची डॉ. अरबिंद साहू और डॉ नरेंद्र नरोत्तम को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया. आमंत्रित वक्ताओं ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में महात्मा गांधी के विचारों और सिद्धांतों पर प्रकाश डाला और उनकी सभी के प्रति सद्भावना दृष्टि को अपनाने की बात कही. उन्होंने व्याख्यान देते हुए कहा कि अगर देश को और मानव समाज को हमें एक सुरक्षित भविष्य की और ले जाना है तो एक सस्टेनेबल विकास की राह पर चलना होगा और सस्टेनेबल विकास का पथ गांधी दर्शन के बिना अधूरा है. आमंत्रित वक्ताओं के अलावा  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने भी गांधी दर्शन पर अपना विचार रखा. उन्होंने कहा कि अगर उनीसवीं, बीसवीं, इक्सवीं शताब्दी में भी गांधी दर्शन का महत्व बना हुआ है और आज भी राष्ट्र और मानव समाज को उसकी जरुरत महसूस हो रही है तो वास्तव में गांधी जीवन और उनके द्वारा अपनाये और व्यावहारिक रूप से अपने जीवन में प्रयोग किये गए दर्शन में कुछ तो ऐसी महत्वपूर्ण शक्ति है जिसे हमें पहचानना और फिर  समझना होगा और अपने आपको उस राह पर लाना होगा. उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच गांधी स्टडी सर्कल बनाने पर भी जोर दिया.     

    प्रोफेसर ने भी व्यक्त किए अपने विचार 

    विश्वविद्यालय के कुलपति और दो विशिस्ट वक्ताओं के साथ साथ प्रो. मनोज कुमार, प्रो. जे. एन नायक ने भी अपने विचार व्यक्त किये. क्रायक्रम में इन विशिष्ट वक्ताओं के अलावा विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक  और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. इस व्याख्यान के आयोजनकर्त्ता शशि कुमार मिश्रा, संहिता सुचरिता, तुलसी दास माझी ने इसे एक प्रेरणादायी और सारगर्भित व्याख्यान आयोजन बताया.  


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