बोकारो : आखिरकार आंगनबाड़ी सहायिका ने कीटनाशक खाकर जान देने की  कोशिश क्यों की, जानिए पूरा मामला  

    बोकारो : आखिरकार  आंगनबाड़ी सहायिका ने कीटनाशक खाकर जान देने की  कोशिश क्यों की, जानिए पूरा मामला   

    बोकारो(BOKARO):गोमिया प्रखंड अंतर्गत होसिर लरैयाटांड़ स्थित आंगनबाड़ी की सहायिका पूर्णिमा देवी ने अपने घर पर कीटनाशक दवा खाकर आत्महत्या करने का असफल प्रयास किया है. कीटनाशक दवा खाने के बाद पूर्णिमा देवी अपने घर पर बदहवास होकर गिर पड़ी. आनन फानन में परिजनों ने उन्हें गोमिया के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां उनका इलाज चल रहा है.

    कर्ज से परेशान आंगनबाड़ी सहायिका ने की आत्महत्या की कोशिश

    बताया जाता है कि आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका पूर्णिमा देवी अपने बीमारी के इलाज के लिए लिए पड़ोस के लोगों और महिला समूह से लगभग एक लाख रुपए का कर्ज लिया है. जिसे वो चुका पाने में असमर्थ है. कर्जदार बार-बार अपने पैसे वापस मांग रहे थे. जिससे वो काफी ज्यादा मानसिक तनाव से गुजर  रही थी.

    कर्जदारों से है परेशान

    वहीं आपको बता दें कि लगभग दो महीने पहले पूर्णिमा देवी ने कुछ लोगो को बताया था कि उसके सिर पर लगभग एक लाख रुपए का कर्ज है, पैसे वापसी को लेकर कर्जदार परेशान कर रहे हैं.  फिलहाल, वो पैसे चुकाने में असमर्थ है. इसलिए उसने इस तरह का कदम उठाने की ठानी. क्योंकि, आगे किसी से मदद की कोई गुंजाइश और उम्मीद नहीं दिख रही थी. आपको बता दे एक साल पहले आंगनबाड़ी सहायिका पूर्णिमा देवी के पति का निधन हो गया था. उनका कहना है कि राज्यांश से मिलने वाली मानदेय की राशि तो मिल जाती है, लेकिन, केन्द्रांश से मिलने वाला मानदेय की राशि लगभग छ महीने से नहीं मिली है.

    ये है पूरा मामला

    पूर्णिमा देवी के मानदेय के संबंध में गोमिया के बाल विकास पदाधिकारी अलका रानी से पूछने पर उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर केन्द्रांश और राज्यांश दो जगहों से राशि आबंटन होता है. राज्यांश से मिलने वाली राशि जुलाई महीने तक का दिया जा चुका है, और केन्द्रांश से मिलने वाली राशि का आबंटन नहीं आया है, इसलिए इसके लिए वरीय अधिकारियों से बात करूंगी.बता दें कि द न्यूज पोस्ट ने बीते 10 जुलाई को पूर्णिमा देवी की व्यथा को प्रमुखता से दिखाया था.

    रिपोर्ट-संजय कुमार


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