छह दिनों में एक ही परिवार में हुई तीन मौतें, जहर खाकर भी नहीं मरा तो घर के मुखिया ने अस्पताल से भागकर दे दी जान

    छह दिनों में एक ही परिवार में हुई तीन मौतें, जहर खाकर भी नहीं मरा तो घर के मुखिया ने अस्पताल से भागकर दे दी जान

    धनबाद(DHANBAD) : एक ही परिवार में 6 दिनों में तीसरी मौत. नाती और बेटी के मरने के बाद हताश टीपन महतो ने फांसी लगाकर जान दे दी है. अस्पताल से भागकर पास की बस्ती में फांसी लगा ली. कीटनाशक दवा खाने के बाद भी मौत नहीं हुई तो टीपन महतो ने फांसी लगाकर जान दे दी. सरायढेला थाना क्षेत्र के स्टील गेट इलाके में शनिवार की शाम एक व्यक्ति का शव पेड़ से झूलता पाया गया. उसके बाद जांच पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि यह शव बरवा अड्डा के पांडे बरवा में 21 फरवरी को सामूहिक रूप से कीटनाशक दवा पीकर जान देने का प्रयास करने वाले परिवार के मुखिया टीपन महतो का है. टीपन महतो शनिवार सुबह से ही अस्पताल से गायब था. डॉक्टरों के राउंड पर आने के बाद मरीज की खोजबीन शुरू हुई. काफी ढूंढने के बाद भी टीपन महतो का पता नहीं चला. परिजन अभी खोजबीन कर ही रहे थे कि देर शाम एक अज्ञात व्यक्ति का शव पेड़ से झूलने की सूचना मिली. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया.

    कैसे हुई नवजात की मौत

    अस्पताल के कर्मियों ने लाश की पहचान टीपन महतो के रूप में की. पहले नाती और फिर बड़ी बेटी की मौत ने उसे तोड़ कर रख दिया था और वह जान देने पर आमादा था. अभी भी टीपन महतो की पत्नी, एक बेटी का इलाज अस्पताल में चल रहा है. 20 फरवरी को टीपन महतो के 3 माह के नाती की मौत हो गई थी. वह बीमार था और कोलकाता ले जाने के दौरान दम तोड़ दिया. 24 फरवरी को बड़ी बेटी और नवजात की मां गीता देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई. 26 फरवरी को नाती, बेटी की मौत के बाद में अस्पताल से भागकर फांसी लगाकर जान दे दी. इस घटना ने कई तरह के सवाल छोड़े हैं. अप्रत्यक्ष आरोप बेटी के ससुराल वालों पर भी लग रहे हैं. कहा जा रहा है कि टीपन महतो की मृत बड़ी बेटी को ससुराल में प्रताड़ित किया जाता था. इस वजह से वह मायके चली आई थी. मृत नवजात के इलाज को लेकर भी परिवार दबाव में था और यह हृदय विदारक घटना हो गई.

    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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