सावन में बिना लहसुन-प्याज खाने वालों को अब यात्रा में नहीं होगी दुविधा, रेलवे ने दी ये खास सुविधा

    सावन में बिना लहसुन-प्याज खाने वालों को अब यात्रा में नहीं होगी दुविधा, रेलवे ने दी ये खास सुविधा

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : देश भर में श्रावणी मेले को लेकर तैयारी की जा रही है. इसके साथ ही गंगाधाम से बाबाधाम आनेवाले श्रद्धालुओं का आना भी शुरू हो गया है. कवारियों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ न हो इन तमाम बातों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. सावन का महिना शुरू होते ही कई लोग ऐसे हैं जो मांसाहारी खाना छोड़ देते हैं. वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो लहसुन प्याज तक खाना छोड़ देते हैं. खासकर जो कांवरिया बाबा धाम जल चढ़ाने जाते हैं वह लोग लहसुन प्याज का भी उपयोग अपने खाने में नहीं करते हैं. ऐसे में यात्रा के दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कवारियों को ऐसे दुकान नहीं उन्हें मिल पाते हैं जहां पर बिना लहसुन और प्याज के खाना बने. खाने को लेकर कई तरह की समस्या झेलनी पड़ जाती है. इस समस्या को देखते हुए अब रेलवे स्टेशनों पर शुद्ध शाकाहारी नाश्ता और अन्य व्यंजनों की व्यवस्था करने की तैयारी की गई है. जहां लोगों को इन स्टेशनों पर खाने की दिक्कत महसूस नहीं होगी. पूरे सावन के महीने के लिए बिना लहसुन-प्याज के भोजन की व्यवस्था है. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के फलों की भी व्यवस्था की गयी है.

    इन स्टेशन पर मिलेगी सुविधा

    इस सुविधा के बारे में आपको जानकारी देते हुए बता दें कि यह निर्देश आईआरसीटीसी (IRCTC) की ओर से जारी किया गया है. साहिबगंज, कहलगांव, मालदा, भागलपुर, सुल्तानंगज और जमालपुर स्टेशनों पर बने रेलवे के स्टॉल और कैंटीन में बिना लहसुन-प्याज के भोजन परोसा जाएगा. जहां स्टॉल संचालकों को निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है. पूजा के दौरान साफ सफाई काफी आवश्यक है.  जिसे देखते हुए स्टॉल कर्मियों को अपने बाल और नाखून साफ ​​रखने का भी निर्देश दिया गया है. साथ ही खान-पान की मॉनिटरिंग के लिए रेलवे के वाणिज्य विभाग के अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है.

    श्रावण में पवित्र ज्योतिर्लिग के जलाभिषेक का खास महत्व 

    इस महत्व के बारे में बताया जाता है कि बहुआयामी स्वरुप के कारण इस माह को पवित्र और सर्वोतम मास माना जाता है. यही कारण है कि श्रावण में पवित्र ज्योतिर्लिग के जलाभिषेक का खास महत्व है और भक्तों को भी इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती. इस दौरान सुल्तानगंज स्थित उत्तर वाहिनी गंगा से गंगाजल लेकर कांवरिया का हुजूम देवघर की ओर आ जाता है. कहा जा सकता है कि गंगा मइया सुल्तानगंज से देवघर की ओर इन कांवरियों द्वारा लाए जल के माध्यम से चली आती है. 


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