यह  कोई फिल्मी दृश्य नहीं! देखिये डेढ़ घंटे तक बालू लदे ट्रैक्टर पर कैसे कब्ज़ा जमाये रहा हाथी 

    यह  कोई फिल्मी दृश्य नहीं! देखिये डेढ़ घंटे तक बालू लदे ट्रैक्टर पर कैसे कब्ज़ा जमाये रहा हाथी

    धनबाद(DHANBAD): यह  कोई फिल्मी दृश्य  नहीं है. मदमस्त हाथी की यह करतूत 100 फ़ीसदी हकीकत है.  यह घटना हुई है रविवार को झारखंड के हजारीबाग जिले में. हजारीबाग के मुफस्सिल थाना के हुटपा  पंचायत की  तरवा खरवा में रविवार को हाथी ने बालू लदे ट्रैक्टर को बीच सड़क पर पहुंचकर रोक दिया. उसके बाद तो ट्रैक्टर के चालक और उपचालक  गाड़ी को बीच सड़क पर ही छोड़ कर भाग गए. फिर चालक और उप चालक ने  तस्वीर उतारी . हाथी लगभग डेढ़ घंटे तक बालू लदे ट्रैक्टर को रोके रखा. 

    डेढ़ घंटे तक बालू लदे ट्रैक्टर को रोके रखा 
     
    इस दौरान सड़क भी जाम रही.  लेकिन लोग हाथी के हटने की प्रतीक्षा करते रहे.  हाथी के हटने के बाद ही सड़क पर आवागमन शुरू हो सका.  हाथियों का एक झुंड धनबाद के टुंडी की तरह ही हजारीबाग में भी उत्पात मचा रहा है. तोड़फोड़ करना, लोगों की जान लेना, हाथियों के लिए आम बात हो गई है.  धनबाद के टुंडी में तो पहाड़ी से उतर कर घरों में प्रवेश कर जाते हैं और तोड़फोड़ करते है. वन विभाग ने गांव वालों से अपील की है कि वे घरों में किसी प्रकार की शराब  अथवा महुआ नहीं रखे.  शराब और महुआ खाने के बाद हाथी और मदमस्त हो जाते हैं और फिर हिंसक होकर लोगों की जान तक ले लेते है.  हाथियों के लगातार उत्पात  का असली कारण है कि पारंपरिक गलियारे खत्म हो रहे है.  

    रहवास लगातार हो रहा ख़त्म 

    उनका रहवास  भी समाप्ति की ओर है.  लगातार खनन क्षेत्र बढ़  रहे हैं, कृषि क्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है. इस वजह से हाथियों का पारंपरिक गलियारा खत्म हो रहा है. नतीजा है कि हाथी आबादी वाले इलाके में प्रवेश कर रहे है. एक अनुमान के अनुसार झारखंड में हाथी प्रतिवर्ष 80 लोगों की जाने ले रहे है.  हिंसक होने के बाद तो वह किसी को कुछ नहीं समझते. झारखंड का वन विभाग मशालचियों   के भरोसे लोगों को हाथियों से सुरक्षा देने की कोशिश तो करता है लेकिन इसके फलाफल की कोई गारंटी नहीं होती. झारखंड के मुख्यमंत्री चाहे बाबूलाल मरांडी हो, अर्जुन मुंडा हो, मधु कोड़ा हो, हेमंत सोरेन हो.  किसी के कार्यकाल में हाथियों को रहवास  नहीं मिला और न ही  उनके कॉरिडोर की धूल फांकती  संचिका आगे बढ़ी 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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