TNP SPECIAL: धनबाद में वह भी एक समय था, जब थानेदार थाने की कुर्सी पर ही नींद लेते थे, जानिए इस खबर की पूरी डिटेल्स  

    TNP SPECIAL: धनबाद में वह भी एक समय था, जब थानेदार थाने की कुर्सी पर ही नींद लेते थे, जानिए इस खबर की पूरी डिटेल्स  

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड का धनबाद एक ऐसा जिला है, जो कभी सोता नहीं है. पौ फटने के पहले से ही यहां की गतिविधियां शुरू हो जाती है या यूं कहिए की सूर्य अस्त होने के बाद यह जिला काफी सजक  और गतिशील  हो जाता है. आर्थिक अपराधियों की सक्रियता  वजह हो सकती है. धनबाद पुलिस जिला में 2-3 पुराने कॉन्सेप्ट ऐसे रहे, जो पुलिस के लिए काफी कारगर साबित अपने समय में हुए थे. खासकर जिले के कप्तान के लिए. अगर हम 93-94 की बात करें तो पहली बार यह साबित हुआ कि कोयला चोरी रोकने  के बाद भी अपराध नहीं बढ़ेंगे. बुजुर्ग बताते हैं कि तेज तर्रार एसपी दिनेश सिंह बिष्ट जब यहाँ  कार्यभार ग्रहण किया तो उन्हें यही बताया गया कि कोयला चोरी रुक जाने से अपराध बढ़ जाएंगे. फिर तो उन्होंने  जमीनी स्तर पर काम शुरू किया और यह साबित कर दिया कि कोयला चोरी रुकने से भी अपराध नहीं बढ़ सकते. वशर्ते पुलिसिंग सही होनी चाहिए. उन्होंने धनबाद जिले में अपने ढंग से पुलिसिंग की. उनके समय में तो थानेदार थाने की कुर्सी पर ही सो लेते थे.  

    मुखबिरों की फ़ौज कड़ी की और सबकुछ बदल गया 
     
    मुखबिर की फौज खड़ी की. खुद का  मूवमेंट बढ़ाया. घटना होने पर थानेदारों से पहले पहुंचने का उनका  प्रयास भी काफी कारगर साबित हुआ था.  जिले में किसी भी थानेदार की स्थाई पोस्टिंग  नहीं की, सभी को प्रतिनियुक्ति पर रखा  जाने लगा. इस वजह से थानेदारों में भी डर  बना रहा और वह अपने काम के प्रति सजग और चौकन्ना रहने लगे.  उनका प्रयास होता था कि अगर अपराध की कोई घटना हो गई है, तो खुद घटना स्थल पर पहुंचे.  इससे 2 फायदे होते थे, अपराधी पकड़ाए अथवा नहीं, यह तो बाद की बात है लेकिन प्रथम दृष्टया पीड़ित लोगों को बहुत बड़ी सहानभूति  मिल जाती थी.  हालांकि अपराधों के उद्भेदन में भी उनका प्रयास लोग सराहनीय बताते है.  फिर एक प्रयास हुआ 2017 के आसपास.  जब मनोज रत्न चोथे  धनबाद के एसपी थे. उन्होंने धनबाद में स्पेशल टास्क फोर्स बनाया और किसी भी सूचना पर छापेमारी करवानी शुरू की.  

    थानेदारों को सूचना नहीं रहती और हो जाती थी छापेमारी 

    थानेदारों को सूचना नहीं रहती और एसपी गठित टीम  छापामारी करने के बाद थानेदारों को सूचना देता था.  इसका भी असर दिखा.  हालांकि ,बाद में एसपी गठित टीम  के खिलाफ कई शिकायतें मिलने लगी. उनके जाने के बाद एसटीएफ निष्क्रिय हो गया, हालांकि अभी भी होगा ही, लेकिन उसकी सक्रियता कहीं नहीं दिख रही है. इधर, अपराध की घटनाओं से धनबाद जिला परेशान है. रंगदारी  के लिए ताबड़तोड़ फायरिंग की जा रही है. घटना करने के बाद वीडियो जारी कर जिम्मेवारी भी ली जा रही है. हालांकि पुलिस ने अपराध रोकने की दिशा में अपने तेवर को अब कडा कर दिया  है. लगभग 30 अपराधियों की सूची बनाई गई है और उनके खिलाफ सीसीए लगाने की कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस अभी प्रयास शुरू किया है कि अपराध की घटनाओं में शामिल लोग, अगर फिलहाल जमानत पर हैं तो वह थाने में रोज हाजिरी लगाए.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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