केन्द्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख के बीच हुई लंबी गुफ्तगू, आखिर क्या पक रही है खिचड़ी ?

    केन्द्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख के बीच हुई लंबी गुफ्तगू, आखिर क्या पक रही है खिचड़ी ?

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):-सियासत में तमाम तरह के रंगों में लिपटा रहता है. कौन नेता, कार्यकर्ता और माननीय किस पार्टी में है. इसे जनता समझ नहीं पाती, आम आवाम के बीच तो भाजपा और कांग्रेस के नेता धुर विरोधी बताते फिरते हैं, एक दूसरे पर तोहमतों की बौझार कर लोगों को बरगला तक देते हैं. लेकिन, ये सच्चाई है कि सियासत में कोई किसी का दोस्त-दुश्मन नहीं होता है. सभी का अपना-अपना मकसद, तमन्नाएं और कुर्सी की फिक्र ही होती है.इसिलिए तो कहा जाता है कि इस हमाम में सभी नंगे है.

    लोकसभा चुनाव की बिछ रही बिसात

    मिशन 2024 के लिए बिसात बिछ रही है. लिहाज जुगाड़ भिड़ाने और अपने फायदे के लिए गुणा-गणित से कोई भी परहेज नहीं करना चाहता. ऐसे ही कुछ नजारा तब दिखा, जब दुमका दौरे पर भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केन्द्रीय पर्यावरण वन राज्य मंत्री अश्विन चौबे आए. उनसे जरमुंडी से कांग्रेस विधायक और हेमंत सराकर के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने दुमका परिसदन में तकरीबन देढ़ घंटे तक बंद कमरे में गुफ्तगू की.

    सियासी गलियारों में काफी चर्चा

    सियासी गलियारों में इस मिलन की काफी चर्चा है, सभी अपने-अपने हिसाब से आकलन कर झारखंड की राजनीति किस मोड़ पर जाएगी. इसका विश्लेषण कर रहे हैं. बेशक बादल पत्रलेख की मुलाकात एक शिष्टाचार ही क्यों न हो. लेकिन, क्या बात हुई और क्या भविष्य में नयापन दिखाई पड़ेगा. इसकी अकुलाहट और गर्माहट तो सभी में होगी ही. क्योंकि, कांग्रेस विधायक का इतनी दिल्लगी से बीजेपी नेता अश्विन चौबे से रम कर और तकल्लुफ से बात करना तो कई तरह के सवालों को ही जन्म देता है.

    अचरज तो ये देखी गई कि विधायक बादल बगैर लाव-लश्कर, तामझाम और बिना कार्यकर्ताओं के साथ ही दुमका परिसदन सबुह-सुबह पहुंच गये थे. मानों इसकी पहले से ही रुपरुखा और तैयारी कर ली गई है. हैरानगी तो तब हुई कि, इसके चलते बीजेपी नेता अश्विनी चौबे भी दुमका के आगामी कार्यक्रम को आगे बढ़ाते गए.

    इस मुलाकात के क्या मायने हैं

    बंद कमरे में हुई इस मुलाकात काफी चर्चा और कयास लगाए जा रहे हैं.एक बात तो ये भी सुनाई पड़ रही है कि केन्द्र से हेमंत सोरेन के बीच बनीं दूरियां और तल्खियां को पाटने के लिए एक दूत बनकर पत्रलेख पहुंचे थे. इस आकलन के साथ-साथ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी सभी की सोच ठहर जा रही है. क्योंकि इस चुनाव को लेकर तो वक्त साथ तपीश बढ़ेगी ही . माना जा रहा है कि सियासी गोटियां फिट करने के चलते ही दो धुरी के राजनीतिक दल के नेता आपस में तफ्सील से और मोहब्बत से इतनी लंबी  बातचीत की.  

    बीजेपी सांसद अश्विन चौबे तो संकल्प यात्रा अभियान को लेकर दुमका पहुंचे थे. लेकिन, उनका ये दौरा बादल पत्रलेख से लंबी चर्चा के चलते सुर्खियों में आ गया है. हालांकि, इस पर भाजपा और कांग्रेस के बीच गहरी खामोशी और चुप्पी है, कोई कुछ भी बोलना को तैयार नहीं है. कयासबाजियों का बाजार तो गर्म है, जहां कई सवाल सिर उठा रहे हैं. लेकिन, अंदर-अंदर क्या खिचड़ी पक रही और आगे इसकी क्या हकीकत सामने आयेगी. ये तो वक्त ही सबकुछ तय करेगा औऱ बतायेगा कि आखिर ये मुलाकत के क्या मायने थे.

    रिपोर्ट-शिवपूजन सिंह 


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