संथाल परगना प्रमंडल के गांव में हो सकता है सामाजिक टकराव, जानिए वजह

    संथाल परगना प्रमंडल के गांव में हो सकता है सामाजिक टकराव, जानिए वजह

    दुमका(DUMKA):आने वाले समय में संथाल परगना प्रमंडल के गांव में सामाजिक टकराव हो सकता है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस टकराहट की वजह धीरे धीरे तैयार हो रही है. इसकी भूमिका कुछ दिनों से दुमका में तैयार हो रही है. एक तरफ है आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू तो दूसरी तरफ है ग्राम प्रधान मांझी संगठन.

    कुछ महीनों से आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए लगातार संथाल परगना प्रमंडल का दौरा कर रहे है. हरेक बार उनके द्वारा दुमका परिसदन में प्रेसवार्ता आयोजित की जाती है और निशाने पर रहता है, झामुमो, सोरेन परिवार, कांग्रेस और वंशानुगत आदिवासी स्वशासन व्यवस्था.

    सालखन मुर्मू वंशानुगत आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को सती प्रथा से भी खतरनाक स्वशोषण व्यवस्था करार दे चुके हैं. इस व्यवस्था के तहत नियुक्त होने वाले माझी हडाम, ग्राम प्रधान आदि को अनपढ़, पियक्कड़, संविधान, कानून, देश दुनिया से अनभिज्ञ रहने वाला बता चुके है. उनका मानना है कि यही वजह है कि आदिवासी समाज मे आज भी कई तरह के अंधविश्वास और सामाजिक कुरीति कायम है.

    समाज सुधार को लेकर आदिवासी सेंगल अभियान के बैनर तले सालखन मुर्मू द्वारा 27 फरवरी को दुमका के इंडोर स्टेडियम में प्रत्येक आदिवासी गांव के लिए माझी हडाम के पैरेलल सेंगल माझी और सेंगल परगना को नियुक्ति पत्र देने की शुरुवात की गई.1855 में लागू एसपीटी एक्ट के तहत संथाल आदिवासी गांव में वंशानुगत स्वशासन व्यवस्था कायम है. जिसके तहत नियुक्त माझी हडाम, ग्राम प्रधान आदि को कई अधिकार प्राप्त है. सदियों से चली आ रही इस व्यवस्था पर जब आदिवासी सेंगल अभियान द्वारा चोट किया गया तो विरोध स्वाभाविक है. विरोध की चिंगारी सुलगने लगी है. कुछ दिन पूर्व पुराना समाहरणालय परिसर में ग्राम प्रधान माझी संगठन की प्रमंडल स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें संगठन ने आदिवासी सेंगल अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू के बयान की घोर निंदा की और सालखान मुर्मू का पुतला फूंका था.

    यह कार्यक्रम अंचल स्तर पर भी शुरू कर दिया गया है. दुमका अंचल कार्यालय परिसर में दुमका प्रखंड के ग्राम प्रधानों ने बैठक कर सालखन मुर्मू के बयान की निंदा करते हुए उनका पुतला दहन किया.विरोध की जो चिंगारी भड़की है आने वाले समय में अगर वह संथाल परगना प्रमंडल के गांव में वृहद रूप ले ले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं.

    रिपोर्ट:पंचम झा  


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