फाल्गुन पूर्णिमा पर हुआ अद्भुत हरि-हर मिलन, बैद्यनाथ धाम में निभायी गई अति प्राचीन परंपरा

    फाल्गुन पूर्णिमा पर हुआ अद्भुत हरि-हर मिलन, बैद्यनाथ धाम में निभायी गई अति प्राचीन परंपरा

    देवघर : बाबाधाम की अति प्राचीन परंपरा का किया गया निर्वहन. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही हरि विष्णु ने पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ की स्थापना की थी तब से यहाँ हरि-हर मिलन की परंपरा चली आ रही है. होली ऐसे तो रंगो का त्यौहार है लेकिन इसे मनाने की कई परंपरा अलग-अलग जगहों पर प्रचलित है.

    कही लठमार होली मनाई जाती है तो कही फूलों से लेकिन बैद्यनाथ धाम में होली के अवसर पर हरि और हर के मिलन की अति प्राचीन परंपरा चली आ रही है जिसका निर्वहन लगातार जारी है. जानकारों के अनुसार आज ही के दिन हरि ने अपने हाथों पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी और इसी क्रम में हरि और हर का मिलन हुआ था तब से यहां होली के अवसर पर हरि-हर मिलन की परंपरा चली आ रही है.

    हरि ने वेष बदल कर रावण के हाथ से शिवलिंग लेकर की थी स्थापना

    देवघर में होली के अवसर पर हरि-हर मिलन का खास महत्व है. रजानकारों की माने तो रावण जब शिवलिंग को लंका ले जा रहा तभी आज ही के दिन हरि ने वेष बदल रावण के हाथ से पवित्र शिवलिंग लेकर अपने हाथों यहा स्थापित किया था. हरि यानी विष्णु और हर यानी महादेव. हरि द्वारा हर को स्थापित करने के दौरान हरि और हर का अदभूत मिलन हुआ था. होली के अवसर पर हरि-हर मिलन की यह परंपरा तभी से चली आ रही है. आज का दिन बैद्यनाथ धाम का स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है.

    हरि-हर मिलन के इस अदभूत दृश्य को देखने के लिए उमड़ी भीड़

    परंपरा के अनुसार एक खास मुर्हूत में हरि को पालकी पर बैठा कर शहर का भ्रमण कराते हुए मंदिर लाया जाता है और फिर पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग के समीप रख कर अबीर-गुलाल से दोनो को सरोबार किया जाता है. सोमवार की देर संध्या बैद्यनाथ धाम मंदिर से पालकी में बैठ कर हरि को नगर भ्रमण कराया गया और आज सुबह निर्धारित मुर्हूत 5 बजकर 35 मिनट हरि को हर से मिलाया गया. हरि-हर मिलन के इस अदभूत दृश्य को देखने श्रद्धालूओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

    बैद्यनाथ धाम में हरि-हर मिलन के बाद होली मनायी जाती है

    हरि-हर मिलन की यह परंपरा बैद्यनाथ धाम के अलावा किसी अन्य द्वादश ज्योतिर्लिंग में प्रचलित नही है. देवघर में इस अवसर का इंतजार लोगो को बेसब्री से रहता है. परंपरा के अनुसार बैद्यनाथ धाम में हरि-हर मिलन के बाद होली मनायी जाती है. हरि हर मिलन के बाद सुबह 5 बजकर 40 मिनट में बाबा का श्रृंगार पूजा हुआ.

    रिपोर्ट: ऋतुराज सिन्हा 


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