TNP DESK: झारखंड में मलेरिया का कहर काफी ज्यादा बढ़ते जा रहा है खासकर कुछ जिलों में इसकी स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ती दिखा रही है. पूरे राज्य में अब तक 42000 से भी अधिक मामले सामने आए हैं,जिनमें आधे से ज्यादा केस इन 5 जिलों के हैं, चाईबासा, सरायकेला, साहिबगंज, खूंटी और गोड्डा. इनमें से चाईबासा यानी की पूरे पश्चिम सिंहभूम से अकेले ही 16000 से अधिक मरीज मिले हैं.
इसके अलावा गुमला, सिमडेगा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा जैसे दूरस्थ इलाकों में भी संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है.
आने वाले मानसून को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है. मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां रोकथाम के उपाय किए जाएंगे. साथ ही जिन इलाकों में संक्रमण ज्यादा है, वहां जांच और निगरानी को और तेज किया जाएगा.
आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) के करीब 30 हजार से ज्यादा केस और प्लास्मोडियम विवैक्स (PV) के लगभग 9 हजार से अधिक मामले शामिल हैं. अब तक मलेरिया से दो लोगों की मौत भी दर्ज की गई है, जिनमें एक धनबाद और दूसरा साहिबगंज से है.
वहीं राजधानी रांची की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है. साल 2026 के पहले तीन महीनों में यहां बड़ी संख्या में जांच की गई, लेकिन बहुत कम मामले पॉजिटिव पाए गए हैं. राहत की बात यह है कि रांची में इस दौरान मलेरिया से किसी भी मौत की खबर नहीं आई है.

