धनबाद के बालू माफिया पचा बैठे हैं बिहार सरकार का 250 करोड़, उठने लगा है चेहरे  से नकाब 

    धनबाद के बालू माफिया पचा बैठे हैं बिहार सरकार का 250 करोड़, उठने लगा है चेहरे  से नकाब

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद में रहकर बिहार में बालू का खनन कराने वालों पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कसता जा रहा है.  ब्राड सन कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड और आदित्य मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के निर्देशको और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिख रही है. 5 जून को प्रवर्तन निदेशालय ने बिहार, झारखंड के धनबाद और हज़ारीबाग़ ,पश्चिम बंगाल में छापेमारी की थी. धनबाद में 5 से अधिक जगहों पर 5 जून को प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की थी. अब तक मिली जानकारी के अनुसार इन दोनों कंपनियां चलाने वालों ने  बालू का अवैध खनन कर 250 करोड़ के राजस्व का नुकसान सरकार को पहुंचाया है.  

    पहले से दर्ज मामलो को आधार बनाया है ईडी ने 

    ईडी की कार्रवाई का आधार बिहार पुलिस की ओर से पूर्व में दर्ज f.i.r. है.  खनन विभाग से भी ईडी  को कुछ जानकारियां मिली है. ईडी  इन कंपनियों के निदेशकों से पूछताछ कर सकती है.  बिहार सरकार को तकरीबन 250 करोड़ राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप इन दोनों कंपनियों पर है.  छापेमारी के बाद 60  बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है. डेढ़ करोड़ नगद  और 11 करोड की प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज जब्त किये गए है. 6 करोड़ के  एफडीआर से संबंधित दस्तावेज के अलावा कई फिजिकल एवं डिजिटल डॉक्यूमेंट भी जब्त  किये गए है.  धनबाद में यह  छापामारी सुरेंद्र कुमार जिंदल, पुंज  कुमार सिंह, जगनारायण सिंह सहित  दोनों कंपनियों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर की गई थी.  धनबाद में इस छापेमारी के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय की पहली बार एंट्री हुई.  इसके पहले धनबाद में कभी प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी नहीं हुई थी.  

    कुछ पहले से तो कई हाल में जुड़े इस धंधे में 
     
    जिनके यहां छापेमारी हुई, उनमें से कई पहले स्क्रैप का काम करते थे, कुछ कोयले का काम करते थे तो किसी  का बालू पुश्तैनी धंधा था. इस छापेमारी से कोयलांचल में  इस बात की चर्चा खूब चल रही है कि कौन कारोबारी मकड़ी की जाल की तरह किसके साथ कारोबार कर रहा है,एक चेहरे  में कितने चेहरे छुपे हुए है , इसका खुलासा हो सकता है.   धनबाद के कारोबारी केवल बिहार, बंगाल ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों के कारोबारियों के साथ भी साझेदार है. यह बात अलग है कि पैसा इनका होता है और कारोबार कोई और करता है.  कोयले के धंधे की ही बात कर ली जाए तो कोयले में इस तरह के काम खूब होते है.  रियल स्टेट के धंधे में भी यह काम चल रहा है और हो सकता है कि जाँच पूरी होने  के बाद कई कारोबारियों के रियल स्टेट में भी पैसा निवेश का खुलासा हो. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  



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