झरिया की बूढ़ी हड्डियां पूछ रही है सवाल - सांसद महोदय हमने तो अपनी जवानी में आपको ग्रेजुएट बनाया, बुढ़ापे में क्यों भुला दिया है मुझे

    झरिया की बूढ़ी हड्डियां पूछ रही है सवाल - सांसद महोदय हमने तो अपनी जवानी में आपको ग्रेजुएट बनाया, बुढ़ापे में क्यों भुला दिया है मुझे

    धनबाद (DHANBAD): झरिया की कोयला मिश्रित मिट्टी कईयों को बाहुबली बना दिया तो कुछ को मंत्री तक की कुर्सी दिलवा दी. झरिया की राजनीति कर कई लोग जमीन से आसमान तक पहुंचे. लेकिन झरिया की मिट्टी आज कराह रही है. झरिया की बूढ़ी हड्डियां अपने ऊपर गर्व करने के बजाए आज आंसू बहा रही है. झरिया के लोग पानी, बिजली, प्रदूषण से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है. बिजली पानी और प्रदूषण संकट झेल रहे झरिया के लोग थाली भी बजाया, बिजली विभाग के अधिकारियों की आरती भी उतारी. बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है. यह समस्या कब तक जारी रहेगी, कहा नहीं जा सकता है. इस भीषण गर्मी में जब पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया है, लोग अपनी जान की परवाह किए बिना बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.

    बात केवल पानी की ही नहीं है, बिजली का भी वही हाल है. शनिवार को झरिया शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति नहीं हुई. रविवार को हो सकता है आंशिक जलापूर्ति हो. शहर के कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां तीन-तीन महीनों से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है. लोग शिकायत कर रहे हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है. वैसे झरिया अभी भी धनबाद की राजनीति का केंद्र बिंदु है. झरिया के बिना न कोई सांसद बन सकता है और न कोई बड़ा नेता.  कोयलांचल की राजनीति ही कोयले से चमकती है. यह बात अलग है कि झरिया के बाद बाघमारा भी इस श्रेणी में आ गया है. लेकिन अभी भी झरिया तो झरिया ही है. झरिया में अभी सत्ताधारी दल की विधायक हैं. ऐसे में लोगों को उनसे उम्मीद थी. लेकिन अब यह उम्मीद टूटती जा रही है. शुद्ध पानी की बात कौन कहे ,अब तो लोग पीट वाटर के लिए भी तरस रहे हैं. घंटों खड़े होकर बाल्टी, डेगची में पीट वाटर भरते हैं और कम से कम नहाने धोने का काम चला रहे हैं. यह पीट वाटर जरूरत के हिसाब से नहीं मिलता.

    झरिया तो धनबाद का ऐतिहासिक शहर है. झरिया में कई निशान आज भी मौजूद हैं, जो यह इस शहर की गौरवपूर्ण इतिहास की गाथा गा रहे हैं. लेकिन पूर्वजों ने झरिया में जो विरासत छोड़ रखी थी ,उसको भी अभी के लोग संभाल नहीं पा रहे हैं. आग, आग का हउवा खड़ा कर झरिया के ऐतिहासिक आरएसपी कॉलेज को बेलगड़िया के छोटे से भवन में शिफ्ट कर दिया गया है .धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय बना तो धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने इसकी क्रेडिट ली. उन्हें क्रेडिट मिलना भी चाहिए. उन्होंने प्रयास भी किया था लेकिन उसी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आरएसपी कॉलेज झरिया की हालत देखकर ऐसा लगता है कि अब इसके दिन नहीं सुधरने वाले .हो सकता है कि आरएसपी कॉलेज झरिया दूसरे विधानसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए भी धनबाद के बाकी जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं देते हो. लेकिन धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह तो झरिया से ही स्नातक की पढ़ाई पूरी किए हैं. उन्हें तो कम से कम कॉलेज की हालत के बारे में सोचना चाहिए. आग का जो हाउवा खड़ा हुआ था, वह आज अब कहां है ,किस स्थिति में है, किस गति से बढ़ रही है या थम गई है ,इसकी कोई रिपोर्ट हाल के दिनों में सामने नहीं आई है. यह बात तो सही है कि झरिया के नीचे भूमिगत आग है. यह आग बढ़ रही है .राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान हो रहा है. बावजूद अभी भी कुछ संभावनाएं हैं. उन संभावनाओं को तलाशने और तराशने की जरूरत है. लेकिन ऐसा करेगा कौन. बड़ा सवाल यही है.

    रिपोर्ट. धनबाद ब्यूरो


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