धनबाद में रैयतों पर डाके का "मास्टरमाइंड" अभी भी पकड़ से दूर, क्या एसीबी के एक्शन की उसे लग गई थी भनक !

    धनबाद में रैयतों पर डाके का "मास्टरमाइंड" अभी भी पकड़ से दूर, क्या एसीबी के एक्शन की उसे लग गई थी भनक !

    धनबाद (DHANBAD): झारखंड में शराब घोटाले की जांच कर रही एसीबी धनबाद को लेकर भी सुर्खियां बटोर रही है. गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार की सुबह तक धनबाद जमीन मुआवजा घोटाले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह गिरफ्तारी झारखंड के विभिन्न जिलों से हुई है. लेकिन अभी तक  इस पूरे घोटाले का "मास्टरमाइंड" एसीबी की पकड़ में नहीं आया है .एसीबी को अभी भी धनबाद के भिश्तीपाड़ा में रहने वाले मास्टरमाइंड की तलाश है. कहा जा रहा है कि भिश्तीपाड़ा में रहने वाले व्यक्ति ने ही पूरे घोटाले की ड्राफ्ट तैयार की और उसके बाद घोटाले को अंजाम दिया गया.

    घोटाले के मास्टरमाइंड की अभी भी एसीबी को तलाश 
     
    एसीबी को उसका मोबाइल लोकेशन भी नहीं मिल रहा है. इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां होगी. इसके लिए टीम गठन किया गया  है.दरअसल ,रघुबर  दास की सरकार ने इस पूरे बड़े घोटाले की जांच के आदेश दिए थे. लेकिन गिरफ्तारी अब हेमंत सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरू हुई है. यह घोटाला बहुत बड़ा घोटाला है और इसका तरीका भी बहुत महीन है. दरअसल, वित्तीय वर्ष 2009-10 में रिंग रोड का प्रस्ताव बना .धनबाद, मनईटांड़,दुहाटांड़ और धोकरा मौजा की जमीन पर रिंग रोड बनाने की योजना तैयार हुई. उसके बाद वित्तीय वर्ष 2010 -2011 में जमीन अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी किया गया. 2012 -2013 में मुआवजा के लिए डीड लिस्ट तैयार की गई. 

    कई फर्जी डीड पर उठा लिया गया जमीन मालिकों का पैसा 

    इसमें  कई फर्जी डीड को भी शामिल किया गया. वर्ष 2013 -2014 में मुआवजा के रूप में करोड़ों रुपए बांटे गए. तत्कालीन उपायुक्त को शिकायत मिली तो जांच टीम गठित कर जांच कराई गई. तो घोटाले का मामला सामने आया. 2014-15 में तत्कालीन डीसी  के निर्देश पर थाने में एफआईआर दर्ज की गई. उसके बाद 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 2015-16 में इस मामले को एसीबी को सौंपा गया. 10 साल तक लगातार जांच चलती रही. 10 साल बाद 2026 में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की और 17 लोगों को गिरफ्तार किया. रिंग रोड मुआवजा घोटाले में लगभग 10 साल बाद एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है. वर्ष 2016 में दर्ज एफआईआर के बाद यह एसीबी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी. इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है .

    इस मामले में 2015 में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, फिर 

    2015 में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. उसके बाद 2026 में 17 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. सूत्र बताते हैं कि फर्जी डीड भी तैयार किया गया और उसके बाद भुगतान लिया गया. कई ऐसे मामले पकड़ में आए हैं, जिनमें फर्जी डीड बनाकर करोड़ों रुपए उठा लिए गए. यह अलग बात है कि इस मुआवजे घोटाले उजागर करने में भाजपा नेता रमेश कुमार राही की बड़ी भूमिका रही. उन्होंने सूचना के अधिकार से लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाया. हर जगह इसकी शिकायत भेजी. जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन देकर प्रमाण दिए. इसके बाद कार्रवाई की गई और इस कार्रवाई में गिरफ्तारियां हुई है.उसके बाद रैयतों पर बहुत बड़े डाके का मामला उजागर हुआ है.आगे और खुलासे होंगे,ऐसा सूत्र बता रहे है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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