पश्चिमी सिंहभूम जिले में DMFT फंड बढ़ा रही बैंकों की शोभा, इधर राशि नहीं होने पर अधर में लटकी ग्रामीण कार्य विभाग की योजना

    पश्चिमी सिंहभूम जिले में DMFT फंड बढ़ा रही बैंकों की शोभा, इधर राशि नहीं होने पर अधर में लटकी ग्रामीण कार्य विभाग की योजना

    चाईबासा(CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम जिले के विकास और कल्याण कार्य के लिए बैंक में जमा DMFT फंड की राशि बैंक की शोभा बढ़ा रही है. वहीं, सूद की राशि बढ़ा कर जिला प्रशासन अपने ही पीठ को थपथपाते नजर आ रही है. जी हां, वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है. लेकिन DMFT फंड की करोड़ों राशि बैंक में पड़ी हुई है. वहीं, एक ओर अन्य विभाग में राशि के अभाव में चालू योजना दम तोड़ते नजर आ रही है. यूं कहा जा सकता है कि ग्रामीण कार्य विभाग में राशि नहीं रहने के कारण संवेदकों को भुगतान करने के लिए लाले पड़े हुए हैं. ग्रामीण कार्य विभाग की चालू योजना में संवेदकों को भुगतान नहीं हो पा रहा है.

    वहीं, दूसरी तरफ जिला प्रशासन के पास करोड़ों की राशि रहने के बाद भी योजना में खर्च नहीं कर रही है. विकास हित में जिले में उपलब्ध DMFT फंड की राशि ग्रामीण कार्य विभाग की योजना में दे कर अधूरे कार्यों को पूरा कराना प्रशासन जरूरी नहीं समझ रही है. जिला प्रशासन खनन प्रभावित क्षेत्रों में कल्याण और विकास कार्य को करने में विफल साबित हो रही है. PMKKKY और DMFT के मार्ग दर्शिका को नज़र अंदाज़ कर जिला प्रशासन अपनी स्वार्थ नीति को पूरा करने में लगी हुई है. विधानसभा चुनाव से पहले स्वीकृत योजना को शुरू कराने में जिला प्रशासन विफल है. छह महीने गुजरने के बाद भी आज तक कार्यकारी एजेंसी जिला प्रशासन के लिए कमिशन वसुली में लगी हुई है. पूर्व डीसी अनन्या मित्तल के कार्यकाल में जिले के विकास का ग्राफ काफ़ी ऊंचा रहा. यहां तक कि कमिशन और घूसखोरी पर भी पाबंदी लगी हुई थी. लेकिन आज जिला प्रशासन अपनी कुर्सी के लिए भ्रष्टाचार की गंगा में डूबी हुई है.

    शिक्षा और स्वास्थ्य की अत्यंत दयनीय व्यवस्था पर जिला प्रशासन का कोई ध्यान है. मात्र पीसीसी सड़क की स्वीकृति दे कर DMFT फंड के कॉलम को पूरा कर रही है. वहीं, जिले में मागे पर्व शुरू हो गया है लेकिन बाजार में आर्थिक संकट देखने को मिल रहा है. ग्रामीण कार्य विभाग में फंड नहीं रहने के कारण योजना का कार्य ठप है. वहीं, जिला प्रशासन के पास करोड़ों राशि है, लेकिन योजना कार्य धरातल पर कहीं नहीं है. जिसके कारण मजदूर और सामग्री ढुलाई करने वाले को रोजगार नहीं मिल पा रहा है.  जिससे बाज़ार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है. जिस पर जिला प्रशासन ध्यान नहीं दे रही है.

    रिपोर्ट: संतोष वर्मा


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