राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी का खेल -रघुवर दास ने ही तोड़ा था मरांडी के झाविमो को 

    राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी का खेल -रघुवर दास ने ही तोड़ा था मरांडी के झाविमो को

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड का स्थापना दिवस अगले महीने राज्य सरकार पूरी तैयारी के साथ मनाएगी , मनाएगी भी क्यों नहीं ,अगले साल चुनावी वर्ष जो होगा.  इधर झारखंड की राजनीति भी कई खट्टे- मीठे अनुभव के साथ आगे बढ़ रही है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय समन  भेज रहा है तो रघुवर सरकार के पांच मंत्रियों के खिलाफ निगरानी ब्यूरो भी जांच तेज कर दिया है.  इन सबों के बीच 15 नवंबर को झारखंड का स्थापना दिवस मनाने की विशेष तैयारी की गई है.  15 नवंबर से सरकार आपके द्वार कार्यक्रम का तीसरा चरण शुरू करेगी.  15 नवंबर को अपोलो मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल का शिलान्याश  रांची स्मार्ट सिटी में किया जाएगा.  अबुआ  आवास योजना की भी शुरुआत होगी.  इसके अलावा  भी अन्य योजनाओं की घोषणा हो सकती है. 

    हेमंत सोरेन हो सकते है पांच साल पूरा करने वाले दूसरे सीएम 

     मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रघुवर दास के बाद दूसरे मुख्यमंत्री होंगे, जो 5 साल का कार्यकाल पूरा करने की ओर आगे बढ़ रहे है.  इसके पहले रघुवर दास   पहले मुख़्यमंत्री बने जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. इनके अलावा झारखंड में राजनीतिक अस्थिरता के कारण कोई भी 5 साल तक मुख्यमंत्री नहीं रह सका था.  2014 में जब चुनाव हुए, उसके बाद रघुवर दास ने बाबूलाल मरांडी के झारखंड विकास मोर्चा को तोड़ दिया था. कुल   छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे.  उन विधायकों में नवीन जायसवाल, अमर कुमार बाउरी , गणेश गंजू, आलोक कुमार चौरसिया, रणधीर सिंह, जानकी यादव शामिल थे.  इसके बाद तो रघुवर दास पांच सालों तक मुख्यमंत्री बने रहे. 

    2019 में नहीं मिली थी भाजपा को बहुमत 
     
    लेकिन 2019 के चुनाव में वह खुद तो हारे  ही, भाजपा को बहुमत नहीं मिला.  इसके बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी, जो सरकार अभी चल रही है.  यह सरकार भी कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरी और अब  भी गुजर रही है.  2024 में झारखंड विधानसभा का चुनाव संभावित है.  इसलिए भी इस बार स्थापना दिवस को काफी धूमधाम और योजनाओं से लुभाने की कोशिश की तैयारी की जा रही है.  नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड बना था और उस समय यह देश का 28 वा  राज्य बना था. 
    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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