हजारों से सिमटकर सैकड़ों में रह गया हिरणपुर वन परिसर का उड़ता बसेरा,हम पेड़ काटते गए… और वो बिना शोर किए चले गए!

    हजारों से सिमटकर सैकड़ों में रह गया हिरणपुर वन परिसर का उड़ता बसेरा,हम पेड़ काटते गए… और वो बिना शोर किए चले गए!

    पाकुड़(PAKUR): पाकुड़ जिले के हिरणपुर वन विभाग परिसर में एक ऐसा अद्भुत प्राकृतिक नजारा देखने को मिलता था, जिसे देखकर हर प्रकृति प्रेमी चकित रह जाता था. वर्षों से यह परिसर हजारों की संख्या में उड़ने वाले चमगादड़ों का सुरक्षित बसेरा बना हुआ था. आसमान में काले बादलों की तरह मंडराते ये जीव किसी भी आगंतुक के लिए आकर्षण का केंद्र रहे है,लेकिन अब यह दृश्य धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है.

    चमगादर कोई पक्षी नहीं बल्की स्थिर जीव है

    चमगादड़, जिसे आम लोग अक्सर पक्षी समझने की भूल कर बैठते हैं, दरअसल एक स्तनधारी प्राणी है. ये अंडे नहीं देते, बल्कि बच्चे पैदा करते है और उन्हें स्तनपान कराते है. यही कारण है कि इन्हें पक्षियों में नहीं, बल्कि उड़ने वाले स्तनधारी जीवों की श्रेणी में रखा जाता है.यह पृथ्वी का एकमात्र ऐसा स्तनधारी है जो उड़ने में सक्षम है.

    पेडों के कटने से विलुप्त हो रही है चमगादड़ों की प्रजाती

    कुछ साल पहले तक हिरणपुर वन परिसर में इनकी संख्या हजारों में थी, लेकिन अब यह संख्या सिमटकर सैकड़ों में आ गई है.इसके पीछे कई संभावित कारण माने जा रहे हैं प्राकृतिक आवास का क्षरण, पेड़ों की कटाई, बढ़ता शहरीकरण, शोर-प्रदूषण और भोजन की कमी जैसे मुद्दे.वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह अनूठा बसेरा इतिहास बन सकता है.

    इनकी संख्या कम होने से लोगों में चिंता है

    स्थानीय लोग भी चिंतित हैं, क्योंकि चमगादड़ न सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं बल्कि कीटों की जनसंख्या नियंत्रित कर खेती को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाते हैं.अब जरूरत है वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सजग होकर इनके संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की, ताकि यह उड़ता बसेरा फिर से जीवंत हो सके और आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अद्भुत प्राकृतिक दृश्य की साक्षी बन सके.

    रिपोर्ट-नंदकिशोर मंडल


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