कोयले की राजधानी धनबाद का मुखौटा रांगाटांड़ खनिक मूर्ति का मिट जाएगा अस्तित्व,जानिए पूरा डिटेल्स 

    कोयले की राजधानी धनबाद का मुखौटा रांगाटांड़ खनिक मूर्ति का मिट जाएगा अस्तित्व,जानिए पूरा डिटेल्स 

    धनबाद(DHANBAD): पेट्रोल पंप को हटाकर खनिक की मूर्ति धनबाद के रांगाटांड़ चौक  पर  लगी थी, लेकिन अब यह मूर्ति  भी यहां नहीं रहेगी. इसे आगे कहीं शिफ्ट किया जाएगा. धनबाद को देश की कोयला राजधानी दर्शाते हुए शहर के मुखौटा के रूप में कोयला खनिक  की मूर्ति तत्कालीन उपायुक्त मदन मोहन झा के कार्यकाल में लगाई गई थी.  हालांकि उसके पहले वहां पेट्रोल पंप था. लेकिन सड़क चौड़ीकरण की वजह से पेट्रोल पंप को धनबाद के बरवाअड्डा  में शिफ्ट कर दिया गया था. बहुत दिनों तक वहां सड़क चौड़ी रही लेकिन उसके बाद खनिक  की मूर्ति लगाई गई.  सूत्रों के अनुसार रेलवे ने अगले 45 साल तक की योजना पर काम करते हुए धनबाद स्टेशन के पुनर्विकास की योजना तैयार की है. 

    रेलवे ने डीसी से मांगी है मंजूरी 
     
    इसी योजना की जद में यह  खनिक मूर्ति आ रही है.  रेलवे ने धनबाद के उपायुक्त को पत्र लिखकर श्रमिक चौक शिफ्ट करने की मंजूरी मांगी है. श्रमिक चौक के लिए प्रस्तावित जगह को जोड़ते हुए फोरलेन सड़क बनेगी. यह फोर लेन रेल  कॉलोनी के बीचो बीच होते हुए रेलवे ऑडिटोरियम तक जाएगी. श्रमिक चौक से पूजा टॉकीज और दूसरी तरफ गया पुल को जोड़ने वाली सड़क भी फोरलेन होगी. वही डीआरएम चौक से रेलवे ऑडिटोरियम की सड़क भी चौड़ी करने की योजना है. ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए नई रेल पटरी बिछाई जानी है. इसके लिए धनबाद स्टेशन के साथ स्टेशन के सामने का नक्शा भी पूरी तरह से बदल जाएगा.  

    चौड़ी सड़क बनाने की है योजना 

    मौजूदा स्टेशन रोड, स्टेशन रोड की दुकान और दुकानों के पीछे की रेल कॉलोनी को मिलाकर चौड़ी सड़क बनाने की योजना पर काम चल रहा है.  रेलवे की योजना पर भरोसा करें तो श्रमिक चौक के पास एक एलिवेटेड फ्लाईओवर बनेगा, जो अभी के स्टेशन रोड के समानांतर विनोद बिहारी चौक तक जाएगा.  वहां से फ्लाईओवर का दूसरा हिस्सा अंग्रेजी के एल के आकार में मुड़कर स्टेशन रोड स्थित रेलवे ऑडिटोरियम तक  जाएगा.  स्टेशन के भीतर जाने वालों को इसी एलिवेटेड फ्लाईओवर से गुजरना होगा.  हालांकि रेलवे को इसमें कई तरह की परेशानिया झेलनी पड़ सकती है.  विरोध भी हो सकता है, चुकी रेलवे स्टेशन के अगल-बगल दुकानें हैं, दुकानों से हजारों की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है.  इसके लिए रेलवे को सख्त कदम उठाना पड़ सकता है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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