दुमका में शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल, पढ़ाई में जैसे-तैसे, यूनिफार्म देने में पीछे

    दुमका में शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल, पढ़ाई में जैसे-तैसे, यूनिफार्म देने में पीछे

    दुमका(DUMKA): जीवन में शिक्षा के महत्व से सभी वाकिफ है. केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई तरह की योजनाएं चलाती है, मध्याह्न भोजन योजना हो या छात्रों को स्कूल यूनिफार्म उपलब्ध कराने की योजना, मकसद बस एक ही है कि छात्रों को विद्यालय से जोड़ कर रखा जाए और अभिभावकों पर अपने बच्चों की शिक्षा के लिए अतिरिक्त बोझ वहन ना करना पड़े, क्योंकि शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार की श्रेणी में आता है.

    शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल

    हम बात कर रहे है झारखंड सरकार द्वारा समग्र शिक्षा के तहत कक्षा 1 से लेकर 8 वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल यूनिफार्म योजना की. योजना के अनुरूप सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को उसके बैंक एकाउंट के माध्यम से 600 रुपया दिया जाता है. जिससे उन्हें 2 सेट स्कूल ड्रेस ओर एक सेट जूता लेना पड़ता है. वर्ष 2023 - 24 के लिए दुमका में लक्ष्य से मात्र 40 से 50 प्रतिशत ही स्कूल ड्रेस का रुपया ही छात्रों के खातों में पहुंच पाया है. जिले की बात करें तो 1 लाख 81 हजार छात्रों को स्कूल ड्रेस देना है, लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग द्वारा 80 हजार छात्रों को ही पोषाक दिया जा सका है. विभाग द्वारा दिसंबर तक शत प्रतिशत छात्रों को पोशाक उपलब्ध कराने का लक्षय रखा गया है.

     पढ़ाई में जैसे तैसे, यूनिफार्म देने में पीछे

    कक्षावार देखें तो कुछ विद्यालयों में 1 और 2 के छात्रों को इस वित्तीय वर्ष में शत प्रतिशत पोशाक छात्रों को दिया गया है.वहीं तीन से लेकर आठवीं के छात्रों को 75% पोशाक के लिए उसके बैंक अकाउंट में रुपया उपलब्ध कराया गया है. कई ऐसे मामले भी सामने आये जहां छात्रों के बैंक अकाउंट से आधार मैच नहीं होने के साथ - साथ कई छात्रों का अकाउंट समय पर न खोलने के कारण उनके अकाउंट में रुपया उपलब्ध नहीं हो पाया है.इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि लक्ष्य के अनुरूप बहुत जल्द स्कूल द्वारा उपलब्ध डेटा के माध्यम से बच्चों को पोशाक के लिए उसके खाते में रुपया उपलब्ध करा दिया जाएगा. वही जिन विद्यालयों में अभी तक छात्रों को पोशाक नहीं उपलब्ध कराया गया है उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

    इस लचर व्यवस्था से उठते है कई सवाल

    सवाल कई हैं, वित्तीय वर्ष के 7 महीने बीत गए, जिले में 50 प्रतिशत छात्रों को ही पोषक की राशि मिल पाई, इसके लिए जिम्मेवार कौन है? क्या लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी? पोषक की राशि मात्र 600 दिया जाता है. महंगाई के इस दौर में महज 600 में 2 सेट पोषक और एक सेट जूता नहीं हो पाता है. नतीजा होता है कि अभिभावकों को इसे खरीदने में अतिरिक्त राशि वहन करना पड़ता है.उम्मीद की जानी चाहिए कि समय की साथ साथ सरकार पोषक राशि बढ़ाएगी ताकि गुणवत्तापूर्ण पोषक पहनकर छात्र विद्यालय पहुंच सके.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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