बढ़ी किसानों की चिंता : कृषि क्षेत्र से जीत  कर आनेवाले माननीय अब तो कुछ बोलिये 

    बढ़ी किसानों की चिंता : कृषि क्षेत्र से जीत  कर आनेवाले माननीय अब तो कुछ बोलिये 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए है और प्रकृति है कि कृपा बरसा ही नहीं रही है. धनबाद जिला भी इससे अछूता नहीं है.  धनबाद जिले में कृषि कार्य यानी धान का बिचड़ा डालना अथवा धान की रोपाई अभी शुरू भी नहीं हुई है.  सावन महीने का यह हाल है, अब बारिश हुई भी तो फसल अनुमान के अनुसार होगी, इसमें संदेह है.  धनबाद के साथ यह दुर्भाग्य है कि इसके कई प्रखंड हैं ,जो कृषि बहुल क्षेत्र हैं ,लेकिन धनबाद की गिनती कोयला उत्पादक जिले के रूप में की जाती है.  नतीजा होता है कि कृषि को लेकर कभी हो हल्ला  अथवा मांग  नहीं होती.  जबकि धनबाद  जिले से कई विधायक पूरी तरह से कृषि क्षेत्र से चुने जाते है.  2023 का हाल बहुत बुरा है.  अगर हम कृषि प्रधान टुंडी इलाके  की बात करें तो वर्षा के अभाव में किसानों की परेशानी बढ़ गई है.  वन विभाग का पौधरोपण कार्य अधर में लटक गया है. 

     सावन धीरे-धीरे बीत रहा है लेकिन धान की रोपाई शुरू नहीं हुई

    सावन धीरे-धीरे बीत रहा है लेकिन धान की रोपाई शुरू नहीं हुई है.  वृक्षारोपण का काम भी प्रभावित है.  ऐसे में किसानों से लेकर अधिकारियों की चिंता भी बढ़ रही है.  टुंडी प्रखंड धीरे-धीरे सूखे की ओर बढ़ रहा है.  एक अनुमान के अनुसार प्रखंड में 200 से अधिक गांव है.  सभी गांव की हालत खराब है.  यहां के लोगों का कृषि ही प्रधान पेशा है.  लेकिन सूखे की आशंका से अब लोगों की चिंताएं बढ़ रही है.  रतनपुर पंचायत की मुखिया गरीबन बीवी का कहना है कि यही स्थिति और आगे रही तो मवेशियों के खाने के लिए लाले पड़ जाएंगे.

    पौधरोपण तक का काम हुआ है प्रभावित 
     
     टुंडी वन विभाग के प्रभारी फॉरेस्टर गोविंद मिस्त्री का कहना है कि वर्षा नहीं होने से सैकड़ों हेक्टेयर में पौधरोपण का कार्य प्रभावित हो रहा है.  टुंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि स्थिति ठीक नहीं है.  वैसे, उन्होंने बारिश की संभावना जताई है.  देखना है कि प्रकृति अब कब अपनी कृपा बरसाती है.   इस साल गर्मी भी बेजोड़ पड़ी, गर्मी ने लोगों को रुला कर रख दिया.  बरसात भी समय से शुरू नहीं हुई और शुरू भी हुई तो जो बारिश अभी हो रही है, उससे कम से कम धान के फसल को तो कोई लाभ नहीं दिख रहा है.  धनबाद में एक अनुमान के अनुसार 40000 से भी अधिक हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है. जाहिर है लाखो लोगो की जीविका ऐसी कृषि पर निर्भर है. 

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