बिजली संकट के खिलाफ बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स उतरा सड़क पर, उपवास का तीसरा दिन


धनबाद(DHANBAD): बिजली संकट के कारण पूरा धनबाद 'आंखों में नींद लिए घूम रहा' है. घर में ना बच्चे सो पा रहे हैं ना बुजुर्ग. बिजली आती नहीं कि चली जाती है. यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं है बल्कि महीनों से यह स्थिति बनी हुई है. डीवीसी और बिजली वितरण निगम के बीच यहां के उपभोक्ता पिस रहे हैं. कभी भुगतान के लिए डीवीसी कटौती करता है तो कभी लाइन में खराबी के कारण बिजली वितरण निगम लाइन काट देता है.
यह स्थिति एक दिन की नहीं, रोज की हो गई है. बरसात का मौसम शुरू हो गया है. ऐसे में पत्ता खड़का नहीं कि बिजली गुल वाली स्थिति धनबाद झेल रहा है. बिजली संकट के खिलाफ बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने आंदोलन की शुरुआत की है. आंदोलन के तीसरे दिन आज व्यवसाई उपवास पर हैं. उनका कहना है कि धंधा- व्यवसाय चौपट हो गया है. घर में रहना मुश्किल हो गया है. जितनीआमदनी होती है वह सब जनरेटर के तेल में चला जाता है. ऐसे में वो क्या करेे. व्यवसाई लोकेश अग्रवाल का कहना है कि आम लोग तो त्रस्त है ह , व्यापारी वर्ग भी त्रस्त है.
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कोई भी डॉक्यूमेंट निकालना हो कोई भी काम करना हो, बिना बिजली के संभव नहीं है. हम लोगों की सिर्फ एक ही मांग है कि 24 घंटे बिजली मिले. वही संदीप मुखर्जी का कहना है कि आजादी के इतने सालों बाद भी बिजली संकट झेलना पड़ रहा है ,यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है. बैंकमोड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रमोद गोयल ने कहा कि आंदोलन तभी कोई करता है , जब हालात बेकाबू हो जाते है. उनका कहना है कि धनबाद को उगाही का केंद्र बना लिया गया है. परेशानी के खिलाफ कोई कुछ बोलता ही नहीं है, ऐसे में लोगों को चैम्बर से भारी उम्मीद होती है.
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आंदोलन की अगुवाई कर रहे चेंबर के संरक्षक सुरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि बिजली से केवल व्यवसाई ही नहीं, आम लोग, हॉस्पिटल चलाने वाले, अपार्टमेंट में रहने वाले सभी परेशान हैं. अचानक 400 यूनिट के ऊपर सब्सिडी खत्म कर दी गई है. जनता के ऊपर बोझ बढ़ा दिया गया है. इससे उपभोक्ता का बिजली बिल डेढ़ गुना हो गया है,
रिपोर्ट: शांभवी / प्रकाश, धनबाद
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