ढुल्लू महतो vs संजीव सिंह की "लड़ाई" अब रेलवे तक, निमंत्रण..फिर मना करने का हुआ अजीबोगरीब "खेल"

    धनबाद: धनबाद में नया" पावर गेम "शुरू हो गया है. कौन किस पर भारी है ,इसे दिखाने और बताने के लिए एक ऐसा "खेल" खेला गया है ,जिसमें धनबाद की राजनीति के साथ साथ रेलवे बुरी तरह फंस गया है

    ढुल्लू महतो vs संजीव सिंह की "लड़ाई" अब रेलवे तक, निमंत्रण..फिर मना करने का हुआ अजीबोगरीब "खेल"

    धनबाद: धनबाद में नया" पावर गेम "शुरू हो गया है. कौन किस पर भारी है ,इसे दिखाने और बताने के लिए एक ऐसा "खेल" खेला गया है ,जिसमें धनबाद की राजनीति के साथ साथ रेलवे बुरी तरह फंस गया है .अब रेलवे को कई सवालों का जवाब देना होगा. 

    दरअसल, धनबाद से मुंबई के लिए साप्ताहिक ट्रेन तो मिल गई है, ट्रेन का उद्घाटन भी हो गया है ,लेकिन यह ट्रेन एक ऐसा विवाद पैदा की है, जिससे धनबाद की राजनीति में "आग" लग गई है .यह आग बहुत जल्द  बुझेगी, इसकी संभावना नहीं है. 

    सूचना के मुताबिक तीन दिन पहले रेलवे ने मेयर संजीव सिंह को उद्घाटन के लिए आमंत्रण भेजा था. झरिया विधायक रागिनी सिंह को भी निमंत्रण दिया गया था. लेकिन सूत्र बताते हैं कि उद्घाटन कार्यक्रम से मात्र 3 घंटे पहले संजीव सिंह और रागिनी सिंह को पत्र भेज कर कार्यक्रम में नहीं आने को कहा गया .अब इस प्रकरण के बाद रेलवे पूरी तरह से कठघरे में खड़ा हो गया है. 

    रेलवे का कहना है कि ऐसे आयोजन में केवल स्थानीय विधायक और सांसद की उपस्थिति का ही निर्देश है. हालांकि मेयर संजीव सिंह इसे राजनीतिक साजिश मान रहे हैं. उन्होंने रेलवे से पूछा है कि आखिर किसके" इशारे" पर उन्हें और झरिया विधायक को कार्यक्रम से दूर रखा गया. 

    बात इतनी ही नहीं है, उद्घाटन के कुछ घंटे पहले स्टेशन पर बनाए गए मंच पर लगे बैनर  को बदल दिया गया. उस बैनर से संजीव सिंह और रागिनी सिंह का नाम हटा दिया गया. मतलब साफ है कि मेयर चुनाव से शुरू हुई यह राजनीतिक लड़ाई अब कार्यक्रम में उपस्थिति तक आ गई है. लोग पूछ रहे हैं कि चुनाव के पहले किसका" ब्लड प्रेशर" बढ़ा था और चुनाव के बाद किसका "ब्लड प्रेशर" बढ़ रहा है. 

    संजीव सिंह के कार्यक्रम में उपस्थिति  से कौन असहज महसूस कर सकता था ?सवाल बड़ा हो गया है क्या निमंत्रण पत्र भेजने के पहले रेलवे ने नियम की जांच पड़ताल नहीं की और क्या ऐसा कोई नियम है, जिसमें जिले के प्रथम नागरिक को बुलाने से पाबंदी है .रेलवे को इसका जवाब देना होगा. संजीव सिंह भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं. उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि दो "मजबूत" लोगों की लड़ाई में रेलवे अपने को सही साबित कैसे करता है?


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