जानिए कैसे ग्रामीणों से आपसी तालमेल मजबूत करने में जुटी है पुलिस और बदलने लगी बूढा पहाड़ की फ़िज़ा

    जानिए कैसे ग्रामीणों से आपसी तालमेल मजबूत करने में जुटी है पुलिस और बदलने लगी बूढा पहाड़ की फ़िज़ा

    रांची(RANCHI): कभी भाकपा माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना कहे जाने वाला बूढा पहाड़ की फ़िज़ा अब बदलने लगी है. पुलिस ने लंबे समय तक इन इलाकों में ऑपरेशन चलाकर बूढा पहाड़ से माओवादियों को खदेड़ भगाया है. पुलिस इन इलाकों में माओवादियों के कई बंकर भी ध्वस्त करने में सफल हुई है. अब पुलिस यहां के ग्रामीणों से आपसी तालमेल मजबूत करने में जुटी है. यही कारण है कि लातेहार व गढ़वा जिला के सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ से सट्टे नक्सल प्रभावित गांव जैसे पीपरढाबा, पुनदाग, चरहो, नवाटोली, तीसिया में सामुदायिक पुलिसिंग का लगातार आयोजन कर रही है.

    जानिए समुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम में किन समनो का हुआ वितरण 

    पुलिस ने यहां सोमवार को सामुदायिक पुलिसिंग का आयोजन किया. जिसमें पलामू रेंज के डीआईजी राजकुमार लकडा, सीआरपीएफ डीआईजी नेगी, लातेहार डीसी भोर सिंह यादव एवं एसपी अंजनी अंजन शामिल हुए. जहाँ उपस्थित बच्चों के उज्जवल भविष्य, बुजुर्गों महिलाओं और ग्रामीणों के बेहतर कल के लिए पठन-पाठन की सामग्री, साड़ी, कंबल, धोती, लूंगी, गमछा, चप्पल, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बच्चों का कपड़ा, बच्चियों का कपड़ा, स्कूल बैग, कॉपी, कलम, पेंसिल, बर्तन, शादी विवाह या समारोह में उपयोग के लिए बड़े-बड़े बर्तन, टी शर्ट, पैंट आदि का वितरण किया गया. तीसिया, नवाटोली, पीपरढाबा, पुनदाग, चिरु के नक्सल प्रभावित गांव में पदाधिकारियों को देखकर ग्रामीण भी काफी खुश दिखे. पुलिस ने ग्रामीणों से नक्सलियों के सफाए में सहयोग करने की अपील की है. बूढ़ा पहाड़ से सटे गांव में पुलिस की मौजूदगी देखकर ग्रामीण खुश हुए और कहा कि पुलिस के आने से हमें लग रहा है कि अब हमारा और हमारे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा. इस मौके पर जिला पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारी समेत सैकड़ों जवान मौजूद थे.


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