रौतिया समाज को एसटी में शामिल करने को लेकर जोरदार आंदोलन, हजारों की संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे लोग

    रौतिया समाज को एसटी में शामिल करने को लेकर जोरदार आंदोलन, हजारों की संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे लोग

    गुमला (GUMLA) : लोकसभा के साथ ही राज्य में आगामी विधान सभा का चुनाव 2024 में होने का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा है कई समाज की ओर से लगातार आंदोलन किया जा रहा है. इसी क्रम में गुमला में अखिल भारतीय रौतिया समाज की ओर से रौतिया समाज को एसटी में शामिल करने को लेकर जोरदार आंदोलन किया गया. जहां एक विशाल पदयात्रा निकली गयी. 

    हजारों की संख्या में पहुचे जिला मुख्यालय 

    जिले में भारी बारिश हो रही है, मगर इस भारी बारिश होने के बावजूद लोग पैदल 21 किमी की लंबी दूरी तय कर हजारों की संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे. जिसके बाद बख्तर सिंह मंडल सिंह सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर सरकार से मांग की गई,मांग ना मानने पर और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गयी है. साय मंडल सिंह सभागार में एक सभा का आयोजन किया गया है, कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे

    रौतिया समाज को केवल राजनीतिक दल वोट- जलेश्वर सिंह

    रौतिया समाज के जिलाध्यक्ष जलेश्वर सिंह ने कहा कि लम्बे समय से उन्हें केंद्र व राज्य सरकार द्वारा ठगने का काम किया जा रहा है लेकिन इस बार वे पूरी तरह से आर पार की लड़ाई के मूड में है. वही रौतिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष रोहित कुमार सिंह ने कहा कि रौतिया समाज को केवल राजनीतिक दल वोट बैंक के रूप में उपयोग करता है लेकिन इस बार वे नहीं मानने वाले है उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो राजनीतिक दलों को रौतिया गांव में प्रवेश भी नहीं करने दिया जायेगा. 

    अपना हक और अधिकार लेकर रहेंगे- लालदेव सिंह 

    इस भीषण बारिश में अपने समाज के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए गुमला पहुंचे रौतिया समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालदेव सिंह ने कहा कि उनका समाज काफी वर्षों पहले से ही एसटी में शामिल था लेकिन एक साजिश के तहत उनका यह अधिकार छीन लिया गया लेकिन अब वे किसी भी हालत में बर्दास्त नहीं करेंगे और अपना हक और अधिकार लेकर रहेंगे उन्होंने कहा कि लोगो के अंदर कितना आक्रोश है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारी बारिश के बाद भी महिला पुरुष व युवा अपने अधिकारों के लिए पैदल चलकर आये. 

    इस बार आर पार की लड़ाई

    यह पहला अवसर था जब इतनी बड़ी संख्या में किसी समाज के महिला पुरुष अपने हक व अधिकार के लिए खराब मौसम के बीच सड़को पर उतरे.  वही रौतिया समाज की यह मांग कोई आज की मांग नही है बल्कि काफी पुरानी है लेकिन इस आक्रोश पूर्ण प्रदर्शन का सरकार पर कितना प्रभाव होता है यह तो समय बताएगा,लेकिन रौतिया समाज इस बार पूरी तरह से आर पार की लड़ाई लड़ने के मूड में नजर आ रहा है.

    रिपोर्ट : सुशील सिंह, गुमला 


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