धनबाद(DHANBAD):झारखंड के कई जिलों में उजागर हुए ट्रेजरी घोटाले के बाद धनबाद जिला प्रशासन भी सजग और सचेत हो गया है. बताया गया है कि 3 साल से जमे बिलिंग क्लर्क को बदल दिया जाएगा तथा पुराने भुगतान की भी जांच कराई जाएगी. जिला स्तरीय टीम कार्यालय का औचक निरीक्षण करेगी. पिछले वर्ष किए गए भुगतान तथा भुगतान की प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी. कर्मियों की जन्मतिथि तथा उनके बैंक अकाउंट की भी जांच होगी. उलेखनीय ही कि उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में जिले के सभी कार्यालयों के निकास एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) द्वारा कोषागार के माध्यम से विपत्रों की निकासी के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने एवं झारखण्ड कोषागार संहिता-2016 के नियमों व वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत विभिन्न पत्रों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समीक्षात्मक बैठक की गई.
सभी कार्यालयों का जिला स्तरीय टीम करेगी रेगुलर इंस्पेक्शन
उपायुक्त ने कहा कि सभी कार्यालयों में जिला स्तरीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा. इस दौरान गलती उजागर होने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान विगत वर्षों में किए गए भुगतान तथा भुगतान की प्रक्रिया की जांच होगी. कर्मियों के सर्विस बुक से मिलान किया जाएगा. कर्मियों की जन्म तिथि एवं उनके बैंक अकाउंट की जांच की जाएगी. उपायुक्त ने कहा कि सभी कार्यालयों में नियमित कर्मियों का डाटा एचआरएमएस पोर्टल पर अपलोड होना चाहिए. कर्मियों की जन्म तिथि एवं बैंक डिटेल्स का मिलान प्रमाणिक स्रोत से होना चाहिए, जिससे गलत भुगतान की संभावना नहीं रहे. इसमें त्रुटि मिलने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी डीडीओ की होगी. सर्विस बुक अपडेट रखें, पीएफएमएस भुगतान पर सभी डीडीओ विशेष ध्यान दें. जिस कार्यालय में 3 वर्ष से अधिक समय तक बिल क्लर्क है, उसे शीघ्र बदलें। विभागीय अनुमति के बगैर खोले गए बैंक अकाउंट शीघ्र बंद करें, निजी अकाउंट में सरकारी राशि जमा नहीं करें, 5000 से अधिक की राशि सीधे वेंडर के बैंक अकाउंट में भेजें.
बैंक खातों में लंबित राशि का विवरण ट्रेजरी को देना होगा
उन्होंने कहा कि सरकारी बैंक खातों तथा सरकारी कार्यालय में संचालित अन्य खातों की जानकारी आईएफएमएस सिस्टम में अपलोड करें. बैंक खातों में लंबित राशि से संबंधित प्रतिवेदन ट्रेजरी को उपलब्ध कराएं. सभी कार्यालय में स्थापना लिपिक एवं विपत्र लिपिक अलग अलग रखें. विशेष परिस्थिति में जहाँ एक ही लिपिक कार्यरत हैं, वहाँ के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी संबंधित लिपिक के कार्य पर विशेष निगरानी रखें. प्रत्येक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी महीने में कम से कम एक बार अपने कार्यालय का विस्तृत निरीक्षण करें. विशेष रूप से लेखा की जाँच करें. बैठक के दौरान ट्रेजरी ऑफिसर पंकज कुमार ने झारखंड कोषागार संहिता - 2016 तथा जेटीसी 2016 के नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्यालय प्रधान, नियंत्री पदाधिकारी अपने अधीनस्थ पदाधिकारी को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की शक्ति प्रदत्त करते है, तो इससे कार्यालय प्रधान विपत्र की परिशुद्धता अथवा भुगतान में प्राप्त राशि के निस्तारण की जवाबदेही से किसी भी तरह मुक्त नहीं होंगें.
पंजियों संधारण में बरते जरुरी सावधानी
कहा कि इसे ध्यान में रखकर कि लेखा का विहित ढंग से तथा विहित पंजियों में संधारण किया गया है. प्राप्तियों एवं व्यय में गैर मुनासिब उतार चढाव के कारणों का अवलोकन करना चाहिए, विशेष रूप से बजट आवटनों की सीमा से संभवतः अधिक खर्च होने के कारणों का अवलोकन करना आवश्यक है. ध्यान में आयी अनियमितताओं तथा उन्हें नियमित करने के लिये की गयी कार्रवाईयों को अंकित करते हुये ऐसे प्रत्येक निरीक्षण के उपरांत नियत्रंक पदाधिकारी को प्रत्येक तिमाही एक रिर्पोट सौंपनी है. बताया कि झारखण्ड़ कोषागार संहिता 2016 के नियमों के अनुसार किसी कार्यालय का प्रधान उसके द्वारा या उसकी ओर से हस्तक्षरित किसी विपत्र पर निकासी किये गये वेतन तथा भत्तो की प्रत्येक मद के लिए स्वयं उत्तरदायी होते है.बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, नगर आयुक्त आशीष गंगवार, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल, निदेशक डीआरडीबी राजीव रंजन, सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक झा, जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार के अलावा सभी कार्यालयों के डीडीओ, विपत्र लिपिक, स्थापना के प्रभारी लिपिक एवं नाजिर उपस्थित थे.


