दुमका(DUMKA):दुमका में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज धूप, कभी अचानक बारिश, तो कभी उमस भरी गर्मी. इस अस्थिर मौसम का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी साफ दिखने लगा है.जिले के अस्पतालों में जहां मरीजों की भीड़ बढ़ी है, वहीं पशु अस्पतालों में भी बीमार जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.इसी बीच दुमका में स्ट्रीट डॉग्स के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है.शहर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में कुत्तों की मौत हो रही है, जिससे डॉग लवर्स और पशुप्रेमी बेहद परेशान है.
मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर नामक खतरनाक वायरल बीमारी
विशेषज्ञों के अनुसार, इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर नामक खतरनाक वायरल बीमारी का प्रकोप है, जिसने दशकों बाद जिले में दस्तक दी है.प्रांतीयकृत पशु शल्य चिकित्सालय के कनीय पशु चिकित्सक डॉ अवध कुमार झा का कहना है कि यह एक संक्रामक बीमारी है, जो कुत्तों के श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है.खासकर स्ट्रीट डॉग्स, जिनका समय पर टीकाकरण नहीं हो पाता, इस बीमारी की चपेट में जल्दी आ जाते है.बीमारी के लक्षणों में बुखार, खांसी, आंख और नाक से स्राव, उल्टी दस्त और गंभीर मामलों में झटके अर्थात शरीर में कंपन्न शामिल है.उनका मानना है कि कंपन्न की स्थिति में मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है.
बीमारी से बचाव संभव
हालांकि, राहत की बात यह है कि इस बीमारी से बचाव संभव है. पशु चिकित्सक नियमित टीकाकरण, साफ सफाई और संक्रमित कुत्तों को अलग रखने की सलाह दे रहे है उनका कहना है कि पालतू कुत्ता का टीकाकरण कराते है, लेकिन स्ट्रीट डॉग का टीकाकरण कम होता है यही वजह है कि स्ट्रीट डॉग की मृत्यु दर ज्यादा है.
रिपोर्ट-पंचम झा


