झारखंड में स्टार्टअप पॉलिसी तो बनी, लेकिन वेबसाइट बनाना ही भूल गई हेमंत सरकार, जानिए पूरी खबर

    झारखंड में स्टार्टअप पॉलिसी तो बनी, लेकिन वेबसाइट बनाना ही भूल गई हेमंत सरकार, जानिए पूरी खबर

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-आज के जमाने में सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाले कई युवा मिल जायेंगे. लेकिन, इसके साथ ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं. जो खुद का कारोबार अपने आईडीया से शुरु करना चाहते हैं. झारखंड सरकार ने इन युवाओं को मदद करने के लिए 15 नवंबर 2023 को स्टार्टअप पॉलिसी पेश की. इस खबर के बाद काफी खुशी युवाओं में थी. लेकिन अफसोस की बात ये है कि अभी तक झारखंड सरकार की तरफ से इसे लेकर कोई वेबसाइट ही नहीं बनाई गई . इसके चलते दिक्कत ये हो रही है कि संबंधित पालिसी का नोडल आफिसर कौन है . ये किसी को मालूम ही नहीं चल रहा है. युवाओं को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अपने आईडीया के लिए कहा आवेदन करें.   

    युवाओं को हो रही परेशानी

    कई युवा बिजनेस की तरफ अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनकी सोच ही बिल्कुल अलग होती है. लेकिन, झारखंड सरकार ने युवाओं के लिए स्टॉर्टअप पालिसी लाई. 28 पेजों की पॉलिसी में प्रस्तावना, विजन, मिशन, उद्देश्य, फोकस एरिया, इंफ्रास्ट्रक्चर सहित हर एक विषय का विस्तार से उल्लेख है. यहां सवाल ये खड़ा हो रहा है कि आखिर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र या दूसरे शहर के युवा कैसे आवेदन कर सकते हैं. कैसे अपने आइडिया को सबमिट कर सकते हैं. क्योंकि अभी तक सरकार ने कोई वेबसाइट ही नहीं बनाई है. इसके चलते ये मालूम नहीं पड़ रहा है कि संबंधित पालिसी का नोडल ऑफिसर कौन है या इसके लिए सरकार ने किस संस्थान के नोडल एजेंसी के रुप में प्रतिनियुक्त किया है. जो स्टार्टअप करने वाले युवाओं को तकनीकी रुप से सहयोग कर सके.

    रघुवर सरकार में भी हुई थी पहल

    झारखंड में जब भाजपा की सरकार थी, तो रघुवर दास की सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की जिम्मेदारी आइआइएम अहमदाबाद को दी थी. डिपार्टमेंट आफ आइटी एंड ई-गर्वेवांस के सहयोग से इसके लिए संस्थान की ओर से अटल बिहारी वाजपेयी इनोवेशन लैब तैयार किया. इसमे 419 स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए और 22 को शीड फंड भी दिए गए. इसके साथ ही 43 इक्यूबेटर तैयार किए गए. लेकिन, राज्य में सरकार के बदलते ही कांट्रेक्ट का रिन्युअल नहीं हुआ. जिसके चलते 2020 के बाद से संबंधित वेबसाइट पर कोई अपडेट नहीं हुआ. पालिसी के मुताबिक राज्य का आइटी निदेशक ही इंक्यूबेशन सेंटर का पदेन चेयरमैन होता है. लेकिन, झारखंड मं पिछले कई महीने से आइटी निदेशक का पद भी खाली है.


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