SNMMCH धनबाद: वेंटिलेटर की सुविधा होने के बाद भी लगातार हो रही बच्चों की मौत! जानिए वजह

    SNMMCH धनबाद: वेंटिलेटर की सुविधा होने के बाद भी लगातार हो रही बच्चों की मौत! जानिए वजह

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद का SNMMCH.  जहां वेंटिलेटर की सुविधा रहते हुए बच्चे को वेंटिलेटर नहीं मिलता है और उसकी मौत हो जाती है. जहां नेशनल मेडिकल कमीशन के निरीक्षण के बिना सीटों की संख्या नहीं बढ़ती है. वहीं बढ़ी हुई सीटें घटकर आधी हो जाती है. इसी SNMMCH  का निरीक्षण करने गुरुवार को झारखंड सरकार के अपर स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार सिंह धनबाद पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों के साथ अस्पताल परिसर, वार्ड, रोगियों के भोजन बनाने के स्थान, शौचालय आदि का बारीकी से निरीक्षण किया. एक एक कमरे  को खोलवा कर देखा.  

    सुविधा नहीं होना चिंता की बात

    उनके साथ धनबाद के उपायुक्त संदीप कुमार भी थे. उन्होंने स्वीकार किया कि धनबाद का SNMMCH बहुत पुराना मेडिकल कॉलेज है और यहां सुविधाओं का नहीं होना, चिंता की बात है. सरकार की कोशिश है कि जल्द ही सभी परेशानियों को दूर किया जाये. झारखंड में कुल 5 मेडिकल कॉलेज है, सरकार पांचों मेडिकल कॉलेज को लेकर चल रही है. धनबाद के मेडिकल कॉलेज में जो फैकल्टी की कमी है, उसे जल्द दूर कर लिया जाएगा. प्रमोशन जो लंबित है, उसे भी 10 दिनों के भीतर ठीक कर दिया जाएगा. 

    लोकल मैनेजमेंट को काम पर ध्यान देने की ज़रूरत

    संदीप कुमार ने यह बात स्पष्ट रूप से मीडिया के कैमरे पर कहीं कि अधिकारी और कर्मचारियों को मनोयोग से काम करना होगा.  इसकी कमी यहां साफ-साफ दिख रही है. साफ- सफाई की व्यवस्था सही नहीं है. आउटसोर्सिंग एजेंसी पर किसी का ध्यान नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि अस्पताल पर निर्भर लोगों को समय पर सुविधा उपलब्ध हो, जिसे उन्हें कोई परेशानी नहीं हो. बता दें कि धनबाद का यह कॉलेज पिछले 6 साल से सीट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सीटें नहीं बढ़ रही है. यहां 2013 में एक सौ सीटों पर नामांकन होता था, लेकिन 2017 में निरीक्षण में फैकल्टी की कमी होने के कारण एक सौ सीटों की अनुमति रद्द कर कर दिया गया.   और 2017 से 2022 हो गया लेकिन 2022 में भी 50 सीटों पर ही नामांकन हो पाएगा, क्योंकि नेशनल मेडिकल कमीशन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण नहीं हो पाया है.  उन में सीटों की संख्या यथावत बनी रहेंगी.

    रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद



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