बेटी नहीं तो बहू कहां से लाओगे,पढ़िए झारखंड के कुछ जिलों का लिंगानुपात,आखिर धनबाद क्यों सबसे निचले पायदान पर 

    बेटी नहीं तो बहू कहां से लाओगे,पढ़िए झारखंड के कुछ जिलों का लिंगानुपात,आखिर धनबाद क्यों सबसे निचले पायदान पर 

    धनबाद(DHANBAD): 
    या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    आज इस मंत्र की जाप प्राय सभी लोग किए होंगे और आगे भी करेंगे. लेकिन इसी के बहाने यह भी जान लेना जरूरी लगता है कि जहां आप रहते हैं,वहा का सेक्स अनुपात क्या है. झारखंड के कई जिलों में लिंगानुपात की स्थिति क्या है. क्या है सेक्स अनुपात  धनबाद में.धनबाद में तो समूचे झारखंड में सबसे कम बताया गया है. झारखंड के पश्चिम सिंहभूम में प्रति 1000 पुरुषों पर 1004 बेटियां हैं,  पाकुड़ में 975, लोहरदगा में 970, सिमडेगा में₹969, लातेहार में 968, बोकारो में 912, गिरिडीह में 943 और धनबाद में यह अनुपात 908 है. लिंगानुपात में सुधार के लिए 2015 में केंद्र सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे के साथ अभियान शुरू किया था. बावजूद इसके धनबाद का मिजाज अभी पहले की तरह ही है. कोई बदलाव आंकड़े नहीं बता रहे हैं.

    बेटी के जन्म पर नहीं होती खुशी 

    पिछले दो दिनों यानी अष्टमी और नवमी को कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है. माता के सभी स्वरूपों को मान नौ कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धनबाद में भी यह परंपरा का निर्वहन खूब किया जाता है. लेकिन कुंवारी कन्याओं को खोजने में लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं .एक-एक कन्या को कई घरों को जाना पड़ता है. कोई कुछ भी कह ले लेकिन जब घर में बच्चों का जन्म होता है और घर वालों को बताया जाता है की बेटी हुई है तो ऐसा बहुत कम लोग ही होंगे जो नाक भौं नहीं सिकुड़ते होंगे. दूसरी ओर जब कहा जाता है कि बेटा हुआ है तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता . यह बात भी है कि कुछ लोग बेटियों का भी उतना ही स्वागत करते हैं. जितना बेटे का.

    धनबाद में सेक्स अनुपात झारखंड में सबसे कम

    अभी हाल ही में धनबाद के एक नर्सिंग होम में पुटकी के एक व्यक्ति को जब बेटी हुई तो नर्सिंग होम से घर जल ले जाने के लिए उन्होंने पहले गाड़ी सजाई, फिर बैंड बजा बुलाए और उसके बाद घर लेकर गए. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या अभी बहुत ही कम है. धनबाद में तो सेक्स अनुपात झारखंड में सबसे कम है. अभी महिला आरक्षण की खूब चर्चा हो रही है. महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. लेकिन धनबाद में यह संख्या 1000 पुरुषों के अनुपात में केवल 908 का होना चिंताजनक तो कहा ही जा सकता है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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