बोकारो (BOKARO): बोकारो की कांग्रेस विधायक और बोकारो एसपी के बीच एक बार फिर तनातनी का माहौल बनता दिख रहा है. बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने पिंड्राजोरा थाना के 28 अधिकारी और कर्मियों के निलंबन की कार्रवाई को गैर जरूरी बताते हुए एसपी से ही इस्तीफा मांग लिया है. एक कार्यक्रम में पहुंची विधायक से जब मीडिया के लोगों ने सवाल किया कि बोकारो की पुष्पा हत्याकांड में पिंड्राजोरा के 28 अधिकारी और पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, तो विधायक ने कहा कि आप ही बताइए, यह क्या उचित है? कुछ लोग इसमें शामिल रहे होंगे, उनके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए थी, उन पर मुकदमा चलना चाहिए था. लेकिन पूरे थाने को सस्पेंड कर देना सही नहीं है.
आखिर डीजीपी को क्यों आना पड़ा था बोकारो
उन्होंने कहा कि बोकारो एसपी को यह समझना चाहिए उनके सिस्टम में कहीं ना कहीं गड़बड़ी है, जिसकी वजह से इतनी बड़ी घटना हो गई. और इतने दिनों बाद पता चला. दरअसल, विधायक ने लड़की हत्याकांड को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जिला परिषद उपाध्यक्ष की मुक्त कंठ से प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि उन्ही की मिहनत और साहस का परिणाम है कि मामला हाई कोर्ट तक गया. डीजीपी को बोकारो आना पड़ा, समीक्षा हुई और उसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी की गई. फिर कंकालनुमा लाश बरामद की गई. उल्लेखनीय है कि पिछले साल जुलाई महीने में लड़की लापता हुई थी और उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई थी. हत्या कर लाश को जंगल में छुपा दिया गया था.
आरोप लगा कि आरोपी पिंड्राजोरा थाना के सांठगांठ में था
आरोप लगा कि आरोपी पिंड्राजोरा थाना के साथ सांठगांठ में था. वह पुलिस के एक्शन को दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहा था. लेकिन जब बोकारो पुलिस पर दबाव बढ़ा तो नए सिरे से टीम का गठन हुआ और गठन होने के दूसरे दिन ही लड़की की कंकाल नुमा लाश बरामद कर ली गई. इस घटना के बाद बोकारो एसपी ने पिंड्राजोरा के 28 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया था. यह घटना बोकारो से लेकर रांची तक चर्चा में है. लड़की के परिवार वालों की पूरी आस टूट गई है. 9 महीने तक परिवार वाले न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहे. अंततः जिला परिषद उपाध्यक्ष ने पीड़ित परिवार को मदद की और तब जाकर भंडाफोड़ हुआ. इस घटना ने बोकारो पुलिस की वर्दी पर एक बदनुमा दाग लगा लगा दिया है.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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