देखिये-उपभोक्ताओं को कैसे बिजली वितरण निगम लिमिटेड दे रहा झटका पर झटका, सुविधाओं पर भी कैंची !

    देखिये-उपभोक्ताओं को कैसे बिजली वितरण निगम लिमिटेड दे रहा झटका पर झटका, सुविधाओं पर भी कैंची !

    धनबाद (DHANBAD) : बिजली उपभोक्ताओं को झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड झटका पर झटका दे रहा है.  प्रीपेड मीटर लगने की वजह से उपभोक्ता भी कुछ समझ पाते हैं, तब तक उन पर हजारों हजार का बकाया हो जाता है.  इधर, प्रीपेड बिजली बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग ने सख्ती  कर दी है.  नियम बना दिया है कि उपभोक्ताओं को अपने प्रीपेड मीटर के खाते में कम से कम ₹200 तो रखना ही होगा.  जो ऐसा नहीं करेंगे, उनकी बिजली काटी जा सकती है.  सूत्रों के अनुसार विभाग  ₹30,000 या इससे अधिक बकाया रखने वालों की बिजली काट रहा है.  अगर उनके खाते में ₹200 नहीं रहेगा, तो ऑटोमेटिक बिजली कट जाएगी.  

    उपभोक्ताओं को किस्तों में भुगतान की अब नहीं मिलेगी सुविधा 

    एक बड़ा झटका उपभोक्ताओं को यह भी मिल रहा  है कि अब कंज्यूमर किस्तों में भुगतान नहीं कर सकेंगे. प्रीपेड मीटर का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं, जिनका बकाया अधिक है, उन्हें अब यह सुविधा नहीं मिल पाएगी. पहले अधिक बकाया  होने पर किस्तों में भुगतान की सुविधा  मिलती थी.  यानी अब पेट काटकर भी आपको एक मुश्त  बिजली के बिल का भुगतान करना होगा.  इस बीच पता चला है कि 30,000 से अधिक बकाया रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई में विभाग को एक दिन में लगभग 10 करोड रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है.  इससे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई. भागे -भागे  सभी बिजली कार्यालय पहुंचे, हालांकि बकाया राशि जमा करने पर उपभोक्ताओं के घरों की बिजली खुद व खुद बहाल हो गई.  

    विभाग को तो एक दिन में मिल गया दस करोड़ लेकिन 

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एक दिन की सख्ती  से विभाग को 10 करोड रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है.  बता दें कि प्रीपेड मीटर के बिजली का बिल अब उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जा रहा है.  जो उपभोक्ता बिजली विभाग में अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं कराए हैं, उन्हें बिल की जानकारी भी नहीं मिल रही है. सबसे बड़ी समस्या तो उनके लिए है, जो अभी भी बटन सिस्टम के मोबाइल का उपयोग कर रहे है. कुल  मिला -जुला  कर विभाग के नियम से कंज्यूमर उलझन में है. उपभोक्ताओं को नए नियम से "यूज टू " होने में वक्त लग सकता है, तब तक उन्हें विभाग का दंश  झेलना ही पड़ेगा. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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