दूसरी राजभाषा होने के बावजूद 'हो' भाषी लोग सरकारी योजना से कोसों दूर- लको बोदरा की पुण्यतिथि में उभरा स्वर

    दूसरी राजभाषा होने के बावजूद 'हो' भाषी लोग सरकारी योजना से कोसों दूर- लको बोदरा की पुण्यतिथि में उभरा स्वर

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): आदिवासी दार्शनिक ओत गुरु लको बोदरा ने हो भाषा की लिपि भाषा वारङ्ग क्षिति  (चिति) की खोज की थी. उनका जन्म 19 सितम्बर 1919 में हुआ था. जबकि उनका निधन 29 जून 1986 में हुआ था. बुधवार को सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चरल सेंटर में उनकी 36 वीं पुण्यतिथि मनाई गई. आयोजन ऑल इंडिया हो फिल्म एसोसिएशन की ओर से किया गया था.

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    ''हो'' भाषी लोग सरकारी योजना से कोसो दूर

    मौके पर ऑल इंडिया हो फिल्म एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरा बिरुली ने कहा कि आज भी ''हो'' भाषी लोग सरकारी योजना से कोसों दूर हैं. राज्य में हो भाषा को द्वितीय राज्यभाषा का दर्जा तो मिला लेकिन ना तो शिक्षकों की बहाली हुई है ना ही ‘हो’ भाषा की पुस्तकें सरकारी स्तर पर छप रही हैं. आज भी हो समुदाय के लोग हो भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आंदोलित हैं. चुनाव के वक्त राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में हो भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा की थी, मगर ये घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला के रूप में दिख रहा है. आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन किया जाएगा. श्रद्धांजलि सभा में अध्यक्ष सुरा बिरुली, अजय बिरुली, रमेश बास्के, विनोद ओमंग, सुशील हेस्सा, विश्वजीत लागुरी और पंकज देवगम आदि उपस्थित थे.


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