खत्म हुआ संजीव सिंह का राजनीतिक बनवास : यह तस्वीर क्या लोकल राजनीति का कोई नया एंगल दे रही

    खत्म हुआ संजीव सिंह का राजनीतिक बनवास : यह तस्वीर क्या लोकल राजनीति का कोई नया एंगल दे रही

    धनबाद(DHANBAD):  राजनीति भी कभी-कभी "अबूझ" पहेली बन जाती है.  जीत हुई तो "चाणक्य "बन गए और हार हुई तो बगैर किसी विलंब के अपने अनुसार परिभाषा गढ़ ली.  धनबाद से संजीव अग्रवाल को पार्टी समर्थित उम्मीदवार बनाने में धनबाद के विधायक राज सिन्हा  की बड़ी भूमिका कही जाती है.  वैसे तो महानगर अध्यक्ष श्रवण राय भी विधायक राज सिन्हा  के पसंद के ही है.  यह अलग बात है कि चुनाव परिणाम आने के बाद शनिवार को विधायक राज सिन्हा  ने कहा था कि जनता ने जो जनादेश दिया है, उसका स्वागत करता हूं, संजीव सिंह को जीत की बधाई, हम लोग मिलजुल कर काम करेंगे और शहर को उन्नत करेंगे।  इस परिणाम में जीतने वाले और हारने वाले सभी भाजपा के ही है. 

     चुनाव खत्म हो गया है, अब हम लोगों का पहला काम है कि धनबाद के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।  इधर, रविवार को विधायक राज सिन्हा  के फेसबुक पेज पर एक पोस्ट आया है.  जिसमें उन्होंने लिखा है कि धनबाद नगर निगम से महापौर निर्वाचित होने पर छोटे भाई श्री संजीव सिंह जी के आवास पहुंचकर पुष्प गुच्छ  भेंट किया एवं मुंह मीठा करा कर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी.  आपके नेतृत्व में धनबाद नगर निगम क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें, यही कामना है.  खैर, जो भी हो लेकिन धनबाद में मेयर का चुनाव काफी दिलचस्प रहा.  झरिया से भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति संजीव सिंह भारी मतों से मेयर चुन लिए गए है.  लेकिन उनके चुनाव प्रचार से लेकर वोटो की गिनती तक विधायक रागिनी सिंह कहीं दिखाई नहीं पड़ी. 

     यह अलग बात है कि चुनाव में  जीत के बाद उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा है कि अगर कोई मुझसे  जोड़कर देखेगा, तो यही कहूंगी कि भाजपा की जीत हुई है.  हम लोग मिलजुल कर पूरे धनबाद नगर निगम क्षेत्र का विकास करेंगे।  यह  जीत जनता की जीत है.  जनता जो चाहेगी वही होगा।  उल्लेखनीय है कि पार्टी के निर्देश की वजह से विधायक रागिनी सिंह अपने पति संजीव सिंह के चुनाव प्रचार में या पार्टी प्रत्याशी के समर्थन के चुनाव प्रचार में बिल्कुल तटस्थ रही.  वह कहीं दिखाई नहीं पड़ी थी.  कहा जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें तटस्थ रहने को कहा था.  इस वजह से वह तटस्थ बनी रही.  चुनाव परिणाम आने के बाद भी उनकी कोई गतिविधि नहीं रही.  

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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