झारखण्ड विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर पर बवाल, पूछा पावरफुल कौन मंत्री या अधिकारी?

    झारखण्ड विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर पर बवाल, पूछा पावरफुल कौन मंत्री या अधिकारी?

    रांची (RANCHI): राज्य में ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के सवाल पर विधानसभा के बजट सत्र में अल्प सूची प्रश्न के जरिए उठाया गया. विधायक हेमलाल मुर्मू ने विभागीय मंत्री से पूछा की सरकार के आदेश के बाद भी आखिर 2024-25 की निविदा रद्द क्यों नहीं की गई. 

    विधायक हेमलाल मुर्मू ने सवाल पूछा की क्या मंत्री ग्रामीण कार्य विभाग यह बताये की सरकार के आदेश के बाद ग्रामीण सड़को और पुलों का निविदा रद्द नहीं हुआ.

    क्या यह बात सही नहीं है कि बीड वैधता के 180 दिन समाप्त होने के बाद इसे रद्द करने का प्रावधान है. इसके बावजूद रद्द नहीं किया गया. आखिर ऐसे में सवाल है कि आखिर पावरफुल कौन है. मंत्री या अधिकारी 

    इस टेंडर कि प्रक्रिया पर मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि टेंडर रद्द करने के अनुशंसा के बाद क्षेत्र के विधायकों के अपील पर इसे रद्द नहीं किया गया. रद्द करने पर फिर से लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता. जिससे सड़क और अन्य निर्माण कार्य में देरी होती. 

    विधायक अमित कुमार यादव ने पूछा की ग्रामीण विकास विभाग यह साफ करें की वित्तीय वर्ष में विधायकों के अनुशंसा पर ग्राम सेतुः योजना के तहत पूल का निर्माण कराने की अधिकतम राशि 10करोड़ स्वीकृति की जाती है.

    ऐसे में कभी कभी पूल की लम्बाई ज्यादा होने पर 10 करोड़ की रकम भी कम पड़ जाती है.

    राज्य सरकार ग्रामीण इलाकों की सड़क और पूल पुलिया को लेकर संजीदा है. इस वित्तीय वर्ष के बजट में भी पूल और ग्रामीण सड़क के लिए पैकेज है. हम तेजी के साथ आगे बढ़ रहे है और सभी सड़क का काम पूरा कर लिया जायेगा..

    रिपोर्ट : समीर हुसैन


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