बिहार में राजद: क्या राजश्री यादव बनेंगी दूसरी राबड़ी देवी,क्यों उठाये जा रहे सवाल, पढ़िए विस्तार से!

    बिहार में राजद: क्या राजश्री यादव बनेंगी दूसरी राबड़ी देवी,क्यों उठाये जा रहे सवाल, पढ़िए विस्तार से!

    धनबाद(DHANBAD): तेजस्वी यादव फिलहाल पटना लौट आए है.  लेकिन लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद बिहार में एक नई चर्चा की शुरुआत हो गई है.  कहा जा रहा है कि क्या इतिहास फिर दोहराया जाएगा? मतलब तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव क्या एक बार फिर राबड़ी देवी की भूमिका में आ सकती हैं? यह चर्चा समय के साथ तेज हो रही है.  वैसे भी विधानसभा चुनाव के पहले और उसके बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार में खींचतान चल रही है.  कानूनी संकट भी बढ़ रहा है.  इस वक्त लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल एक बड़ी राजनीतिक और पारिवारिक संकट के दौर से गुजर रही है.  एक ओर  जहां पार्टी के भीतर मतभेद और पारिवारिक कलह  सामने आ रहे हैं, तो दूसरी ओर नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू प्रसाद परिवार पर अदालत का शिकंजा कसता दिख  रहा है.  

    राष्ट्रीय जनता दल के भविष्य पर क्यों खड़े किये जा रहे सवाल 

    यह दोनों परिस्थितियां  ऐसी हैं कि राष्ट्रीय जनता दल के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है.  हाल के दिनों में लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटियों द्वारा तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर सवाल उठाए गए.  लालू प्रसाद को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने तो खुलकर सवाल उठाया और इसका सिलसिला अभी भी जारी है.  शनिवार को भी रोहिणी आचार्य ने एक पोस्ट डालकर तेजस्वी यादव और उनके सलाहकारों पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा था.  दरअसल, लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, मीशा  भारती के खिलाफ आरोप  तय कर दिए है.  अगर इन मामलों में सजा हुई तो राजद  का भविष्य क्या होगा, किन-किन लोगों के  चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी या तो अभी भविष्य के गर्भ  में है.  लेकिन इसी बीच तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव का नाम तेजी से उछला है.

    क्यों ऐसा कह रहा विपक्ष ,क्यों हो रही इतिहास दोहराने की बात 

      विपक्ष का कहना है कि लैंड फॉर जॉब मामले में आरोप तय होने और ट्रायल के बाद लालू प्रसाद के परिवार को जेल जाने की संभावना काफी बढ़ गई है.  ऐसे में तेजस्वी यादव अपनी पत्नी को राजनीति में लाते हैं, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.  विपक्षियों के अनुसार यह वही मॉडल है, जो पहले अपनाया जा चुका है.  पार्टी के भीतर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर परिवार के सदस्य को ही सत्ता की चाबी सौंप दी गई थी.  खैर, जो भी हो लेकिन राष्ट्रीय जनता दल को लेकर बिहार में चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है तेज प्रताप यादव तो पार्टी और परिवार से निष्काशित  कर दिए गए है. दोनों भाइयों में भी मनमुटाव चल रहा है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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