बोकारो स्टील लिमिटेड का क्रन्तिकारी निर्णय ! खुद का रोजगार बढ़ाना हो तो पहुंचिये बोकारो

    बोकारो स्टील लिमिटेड का क्रन्तिकारी निर्णय ! खुद का रोजगार बढ़ाना हो तो पहुंचिये बोकारो

    धनबाद (DHANBAD) : बोकारो स्टील लिमिटेड ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. रोजगार से लोगों को जोड़ने के साथ-साथ अपनी संपत्ति को बचाने का नया निर्णय लिया है. जानकारी के अनुसार 27 गैर आवासीय भवनों को निजी हाथों में किराए पर देने का निर्णय लिया गया है. इन भवनों में कहीं पहले स्कूल तो कहीं स्वास्थ्य केंद्र तो कहीं मार्केट चलते थे. लेकिन एक दशक से भवन बेकार थे. सूत्रों के अनुसार बहुत जल्द इन भवनों  को 33 महीने के रेंट एग्रीमेंट पर देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. तीन बार इसका नवीकरण  कराया जा सकता है. इन भवनों  में पहले 21 में स्कूल चलते थे. तीन में बाजार और तीन में स्वास्थ्य केंद्र चलते थे.  लेकिन अब कई सालों से यह सब बंद थे. अधिकतर भवन खंडहर बन गए है. चोरों ने खिड़की, दरवाजे, ग्रिल गायब कर दिए है. 
     
    पैतृक संस्थान सेल से  किराए पर देने की अनुमति मिल चुकी है
     
    सूत्रों के अनुसार पैतृक संस्थान सेल से इन भवनों  को किराए पर देने की अनुमति मिल चुकी है. बताया जाता है कि इन भवनों को किराए पर देने के निर्णय से खुदरा बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां एक बार फिर बढ़ सकती है. इस योजना के लागू करने से पहले बोकारो स्टील लिमिटेड ने सभी भवनों और उनके परिसर का मूल्यांकन करवाया और उसके आधार पर किराया निर्धारित किया गया है. बोकारो स्टील लिमिटेड की इस पहल की सराहना की जा रही है. हो सकता है कि बोकारो स्टील लिमिटेड को देखते हुए और भी लोक क्षेत्रीय प्रतिष्ठान इस दिशा में कदम बढ़ाये. चुकि कोल इंडिया की अनुषंगी  इकाई हो अथवा अन्य, सभी के पास भावनाओं की लंबी सूची है. उपयोग नहीं होने से या तो भवन खंडहर बन गए हैं या फिर लोगों ने उस पर कब्जा जमा लिया है. 

    बोकारो स्टील लिमिटेड अभी कई कारणों  से है चर्चे में 

    बोकारो स्टील लिमिटेड अभी चर्चे में है. अभी-अभी केंद्रीय कोयला मंत्री और राज्य मंत्री बोकारो पहुंचे थे. बोकारो इस्पात कारखान सार्वजनिक क्षेत्र में चौथा इस्पात कारखाना है.  यह सोवियत संघ के सहयोग से 1965 में प्रारम्भ हुआ. आरम्भ में इसे 29 जनवरी 1964 को एक लिमिटेड कम्पनी के तौर पर निगमित किया गया और बाद में सेल के साथ इसका विलय हुआ. पहले यह सेल की एक सहायक कम्पनी और बाद में सार्वजनिक क्षेत्र लोहा और इस्पात कम्पनियां (पुनर्गठन एवं विविध प्रावधान) अधिनियम 1978 के अंतर्गत एक यूनिट बनाई गई. कारखाने का निर्माण कार्य 6 अप्रैल 1968 को प्रारम्भ हुआ. यह कारखाना देश के पहले स्वदेशी इस्पात कारखाने के नाम से विख्यात है. इसमें अधिकतर उपकरण, साज-सामान तथा तकनीकी कौशल स्वदेशी ही है.  कारखाने का 17 लाख टन इस्पात पिण्ड का प्रथम चरण 2 अक्टूबर 1972 को पहली धमन भट्टी चालू होने के साथ ही शुरू हुआ तथा निर्माण कार्य तीसरी धमन भट्टी चालू होने पर 26 फ़रवरी 1978 को पूरा हो गया.  

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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