दुमका भोलेनाथ की नगरी में आतंक का पर्याय बन चुके लंगूर का रेस्क्यू, आतंक से मिली मुक्ति

    दुमका भोलेनाथ की नगरी में आतंक का पर्याय बन चुके लंगूर का रेस्क्यू, आतंक से मिली मुक्ति

    दुमका(DUMKA): जिला के जरमुंडी बाजार एवं बासुकिनाथ धाम में कुछ दिनों से एक लंगूर आतंक का पर्याय बन गया है. कभी उसका व्यवहार इंसान के साथ मित्रवत होता तो कभी आक्रामक रुख अख्तियार कर लेता. कभी इंसान के साथ बैठ कर बाइक की सवारी करता तो कभी किसी बाइक चालक को धक्का मारकर गिरा देता. भोलेनाथ की नगरी में  हनुमान की अजब लीला देखने को मिला. आधा दर्जन लोगों को घायल कर चुके इस लंगूर के भय से लोग काफी डरे सहमे नजर आ रहे थे. आतंक इस कदर था कि लोग घर से बाहर निकलने से डरने लगे.

    आखिरकार पकड़ा गया लंगूर, आतंक से मिली मुक्ति

    स्थानीय लोगों ने वन विभाग से पहल करने का अनुरोध किया. दो दिनों से वन विभाग की टीम लंगूर को पकड़ने का प्रयास कर रही थी. आखिरकार ग्रामीणों के सहयोग से लंगूर को पकड़ा गया. वन विभाग की टीम द्वारा लंगूर को पकड़ने की काफी कोशिश की जा रही थी लेकिन वह चकमा देकर भाग जाता था. बुधवार को काफी मशक्कत के बाद जरमुंडी बाजार में लंगूर को पकड़ा गया जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली. वन विभाग पिंजड़ा में बंद कर लंगूर को ले गई, जिसे घने जंगल में छोड़ा जाएगा.

    वन विभाग के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया साहसिक कार्य

    वन विभाग की 15 सदस्यीय टीम के अलावा 6 घंटे तक चले रेस्क्यू में सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन मंडल, दीपू झा, अनूप यादव, निशु सिन्हा, सरवन यादव, राकेश झा, सुधांशु गोस्वामी, सनी रावत, निखिल कौशिक ने जान जोखिम में डालकर लोगों को लंगूर के आतंक से मुक्ति दिलाई.


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