पढ़िए -भाजपा नेताओं पर आक्रामक सीता सोरेन क्यों ढूढ़ रही घर वापसी की राह?

    पढ़िए -भाजपा नेताओं पर आक्रामक सीता सोरेन क्यों ढूढ़ रही घर वापसी की राह?

    TNP DESK: दुमका लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद सीता सोरेन की आक्रामकता क्या यूं ही है? या इसके पीछे कोई कहानी है.  क्या वह भाजपा को टाटा बाय-बाय करने का बहाना ढूंढ रही है? क्या अगर घर वापसी की  वह सोच रही है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे स्वीकार करेगा? निर्णय  अब देवर का नहीं, बल्कि गोतनी का होगा.  कल्पना सोरेन के हाथ अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा की कमान है. सीता सोरेन अभी नाला से झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर विधायक है.  वैसे सीता सोरेन के भाजपा नेताओं पर लगाए गए आरोपों के बाद संथाल की राजनीति गर्म हो गई है. भाजपा भी इस मामले में चुप है.  वह भी समय का इंतजार कर रही है.  सीता सोरेन के निशाने पर पूर्व मंत्री लुईस मरांडी और पूर्व सांसद सुनील सोरेन है. सारठ  के विधायक रणधीर सिंह भी  उनके टारगेट पर है.  लेकिन संथाल  यह संकेत  आ रहे हैं कि सीता सोरेन फिर घर वापसी कर सकती है.  वैसे दुमका से चुनाव जीते नलिन सोरेन तो यह कहकर बच निकलते हैं कि वापसी का निर्णय तो पार्टी सुप्रीमो ही कर सकते है. वैसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव के पहले सोरेन परिवार में तोड़फोड़ कर सीता सोरेन को भाजपा में पार्टी का प्रत्याशी बनाया . 

    सुनील सोरेन को हटाकर सीता सोरेन को उम्मीदवार बनाया गया था 

    उसके पहले भाजपा  दुमका से सुनील सोरेन को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी. प्रत्याशी घोषित होने के बाद सुनील सोरेन का नाम वापस ले लिया गया और सीता सोरेन को दुमका से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया.  इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि दुमका से झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रत्याशी कौन होगा. कई तरह की चर्चाएं चलने लगी थी. बात यह भी होने लगी थी  कि हेमंत सोरेन जेल से ही दुमका लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने विधायक नलिन सोरेन पर दांव खेला और यह दावं   फिट बैठ गया और नलिन सोरेन चुनाव जीत गए. अब विधानसभा चुनाव भी सामने है. वैसे जामा विधानसभा क्षेत्र में सीता सोरेन को लीड मिली है.  यह  चर्चा तेज हो गई है कि हो सकता है कि सीता सोरेन फिर झामुमो  में लौट जाए.  लेकिन अभी यह सब कयास है.  वैसे, दुमका सीट हारने के बाद भाजपा में सिर फुटौव्वल चल रही है. लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद संथाल परगना प्रमंडल में भाजपा में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रमंडल की  तीन सीट में से एक मात्र सीट गोड्डा पर भाजपा की जीत हुई है.   राजमहल के साथ- साथ दुमका सीट पर पराजय का सामना करना पड़ा है.  चुनाव परिणाम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में दुमका है.  एक तरफ तो समीक्षा बैठक में कार्यकर्ताओं ने जमकर बबाल काटा, वहीं पार्टी प्रत्याशी रही सीता सोरेन ने जिला से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं पर गंभीर आरोप लगा कर माहौल को और गर्म कर दिया.  

    जामा विधानसभा पर सबकी नजर थी

    दुमका लोकसभा के जामा विधानसभा पर सबकी नजर थी.  क्योंकि झामुमो के टिकट पर सीता सोरेन तीन  बार यहां से विधायक है. पार्टी और परिवार से बगावत कर भाजपा के टिकट पर लोक सभा चुनाव लड़ने वाली सीता सोरेन को खुद उनके विधानसभा क्षेत्र की जनता ने बहुत अधिक समर्थन नहीं दिया. भाजपा को जामा से बढ़त मिली जरूर लेकिन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. 2019 में यहाँ से भाजपा को लगभग 8 हजार की लीड मिली थी, जो इस बार घटकर 6 हजार 700 पर आ गई. झामुमो प्रत्याशी नलीन सोरेन  शिकारीपाड़ा से 7 टर्म के विधायक थे.  इस बार जब पार्टी ने उन्हें लोकसभा का प्रत्याशी बनाया तो शिकारीपाड़ा के मतदाताओं ने नलीन सोरेन का दिल खोल कर स्वागत किया. यही वजह रही कि 2019 में जब शिबू सोरेन प्रत्याशी थे, तो शिकारीपाड़ा से झामुमो को 8840 मतों की बढ़त थी, जो इस बार 25 हजार के पार पहुँच गई.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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