मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने क्यों लिखा- माता पिता चाहते थे इंजीनियर बनाना, लेकिन नहीं बन सका 

    मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने क्यों लिखा- माता पिता चाहते थे इंजीनियर बनाना, लेकिन नहीं बन सका

    धनबाद(DHANBAD): मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने इंडियन स्कूल आफ माइन्स,धनबाद (फिलहाल का आईआईटी आईएसएम) के भवन के साथ जसवंत सिंह गिल की तस्वीर जारी कर दिल को छू लेने वाला संदेश अपने सोशल मीडिया पर जारी किया है. मैसेज में लिखा है -हैप्पी इंजिनियर्स डे ,मैंने कभी कड़ी मिहनत  कर इंजीनियर बनने की नहीं सोची थी. पढ़ाई करने से भी नहीं होता लेकिन फिलहाल मैं एक अवसर इंजीनियर की भूमिका को पाया हूँ  और मुझे गर्व है कि जसवंत सिंह गिल जैसे तेज तर्रार इंजीनियर की भूमिका में वह दिखेंगे. मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं, लेकिन मैं ऐसा साहस नहीं कर सका. अब जाकर मां-बाप की इच्छा पूरी हुई. शुक्रवार को इंजीनियर्स डे था. 

    1965 बैच के छात्र थे जसवंत सिंह गिल
     
     जसवंत सिंह गिल इंडियन स्कूल ऑफ माइंस के 1965 बैच के छात्र थे.  उन्ही  पर आधारित" मिशन रानीगंज "नमक फिल्म बनी है.  इस फिल्म में अक्षय कुमार जसवंत सिंह गिल के रोल में है. और एक काबिल इंजीनियर की भूमिका में दिखेंगे.  कोयला उद्योग की दुश्वारियों पर  बनी फिल्म  का नाम "मिशन रानीगंज दी ग्रेट इंडियन रेस्क्यू" था , लेकिन अब इसका नाम "मिशन रानीगंज दी ग्रेट भारत  रेस्क्यू" हो गया है. इसके पोस्टर भी जारी हो गए है. अक्षय कुमार इस फिल्म में हीरो के रोल में है. यह फिल्म  कोयला खदान के भीतर फंसे मजदूरों को कैसे देसी तकनीक से बाहर निकाला गया, उस पर आधारित है. 

    ECL रानीगंज  की महावीर कोलियरी में फंस गए थे मजदूर 

    वह साल था 1989 का. 65 से अधिक कोयला मजदूर ECL  रानीगंज  की महावीर कोलियरी में फंस गए थे .उसके बाद तो कोयला उद्योग में तहलका मच गया था. रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानियों के बावजूद यह दुनिया का एक बहुत बड़ा सफल ऑपरेशन माना जाता है. इस ऑपरेशन के मुखिया थे आईएसएम के 1965 बैच के अभियंता जसवंत सिंह गिल. इस फिल्म में अक्षय कुमार अभियंता जसवंत सिंह गिल की भूमिका निभा रहे हैं. रानीगंज  की महावीर कोलियरी में जब 65 मजदूर फंस गए थे और कोई तकनीक नहीं काम आ रहा था, विदेश से भी सहायता ली गई थी, लेकिन मजदूर निकाले नहीं जा सक रहे थे. तब जसवंत सिंह गिल ने अपनी देसी तकनीक अपनाई और उन्होंने आदमी की लंबाई का एक कैप्सूल बनाया. कैप्सूल की बनावट ऐसी थी कि उसमें आदमी प्रवेश कर सकता था और सुरक्षित बाहर भी निकल सकता था. उस कैप्सूल के सहारे एक-एक कर महावीर कोलियरी से फंसे 65 मजदूरों को बाहर निकाला गया था.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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