झारखंड में एक साथ 3469 शिक्षकों  की नियुक्ति पर पढ़िए रघुवर दास की पहली प्रतिक्रिया 

    झारखंड में एक साथ 3469 शिक्षकों  की नियुक्ति पर पढ़िए रघुवर दास की पहली प्रतिक्रिया 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में शुक्रवार को एक साथ 3469 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों मिला. यह उन परिवारों के लिए खुशी और गौरव की बात है, जिनके घर के बच्चे आज शिक्षक नियुक्त हुए है. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इसके पहले हमने जेपीएससी पास करने वाले को नियुक्ति पत्र दिया. यह जानकर सबको खुशी हो रही होगी कि बी पीएल घर के बच्चे अब अधिकारी बन रहे है.  झारखंड सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है.  मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी, सरकार पूरी तरह से सजग  है.  लेकिन इसके साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने  एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि कड़े संघर्ष और युवा विरोधी हेमंत सरकार को हराकर नौकरी पाने वाले हाई स्कूल शिक्षकों को मैं बधाई देता हूँ  मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति विशेष आभार व्यक्त करता हूं कि अगर न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं हुआ होता तो इन शिक्षकों की नियुक्ति संभव नहीं हो पाती. 

    युवाओं और नौकरियों के बीच अब कोई बाधा खड़ी न करे सरकार 
     
    मैं हेमंत सरकार से हाथ जोड़कर आग्रह करता हूं कि युवाओं और नौकरियों के बीच अब कोई बाधा खड़ी न करें, उनका कैरियर तबाह नहीं करे. पूर्व मुख़्यमंत्री ने कहा कि  जिन नियुक्तियों को  रघुवर सरकार का पाप कहते थे हेमंत सोरेन, आज उन्हीं नियुक्तियों का श्रेय लेने के लिए अखबारों में विज्ञापन छपवा रहे है. खेल गांव में समारोह करना पड़ रहा है.  आज जब हेमंत सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आगे विवश होकर हाईस्कूल शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटना पड़ा है, तो जनता को ये जानने का हक है कि इन नियुक्तियों को रोकने के लिए हेमंत सरकार ने क्या-क्या प्रपंच किये है. 

    हाईस्कूल के 17,786 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई थी 

    हाईस्कूल के 17,786 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया  भाजपा सरकार ने 2016 में शुरू की थी. हजारों युवाओं को नियुक्ति पत्र सरकार दे चुकी थी.  प्रक्रिया के अंतिम चरण में यह मामला न्यायालय में चला गया, जिसकी वजह से बाकी कि प्रक्रिया लंबित हो गई.  हेमंत सरकार ने सत्ता संभालने के बाद सबसे पहले नियुक्तियों को ठंढे बस्ते में डालने का काम किया. न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखने की बजाय मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार झारखंड के युवाओं को नौकरी नहीं मिले, इसके लिए प्रयास करती रही. इतना ही नहीं हेमंत सरकार ने मेरी सरकार में शुरू की गयी नियुक्तियों से संबंधित सभी विज्ञापनों को ही वापस लेने का आदेश दिया, उन्हीं विज्ञापनों में पंचायत सचिव व लिपिक के  भी विज्ञापन थे. आज जिन हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति का श्रेय हेमंत सरकार लेने का प्रयास कर रही है, दरअसल उसके वास्तविक हकदार हमारे युवा हैं, जिन्होंने मजबूती के साथ अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखा और फैसला उनके हक में आया.  यह नियुक्ति हेमंत सरकार के मुंह पर युवाओं का करारा तमाचा है.  


    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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